कृष्ण कांत सिंह। हजारीबाग हजारीबाग के हर एक पेट्रोल पंप में ये पोस्टर लगा हुआ मिल जाता है की नो हेलमेट नो पेट्रोल। लेकिन यह पोस्ट सिर्फ शोभा के लिए है। हकीकत यह है की लगभग 75 प्रतिशत बाइक सवार बिना हेलमेट के पेट्रोल लेने पहुंचते हैं और बिना रोक-टोक के पेट्रोल पंप के कर्मचारी इन्हें पेट्रोल दे देते हैं। हजारीबाग की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पेट्रोल पंपों पर यह व्यवस्था लागू की गई थी। व्यवस्था तो लागू की गई लेकिन इस पर इम्प्लीमेंट नहीं हुआ। आज आप हर पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट लगाए लोगों को पेट्रोल लेते देख सकते हैं। शहर के अंदर लगभग एक दर्जन पेट्रोल पंप है और सभी पेट्रोल पंपों की स्थिति लगभग यही है। इस लापरवाही का नुकसान यह है कि धीरे-धीरे हेलमेट पहनकर आने वालों की संख्या लगातार गिरती जा रही है। कई ऐसे पेट्रोल खरीदने वाले लोगों से बात की तो वे संशय में पड़ गए। आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे लोगों में पढ़े लिखे युवा ज्यादा शामिल हैं। पेट्रोल पंप के एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया की कई बाइकर्स ऐसे आते हैं जो हेलमेट भी नहीं पहनते हैं और पेट्रोल नहीं देने पर झगड़ा करने लगते हैं। लाचार होकर पेट्रोल पंप कर्मी इन्हें पेट्रोल दे देते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह व्यवस्था कैसे सुधरे। पूर्व में दिए गए आदेश का पालन कैसे हो। सड़क दुर्घटना के निरंतर आ रही खबरों के बीच पेट्रोल पंप पर यह स्थिति चिंता में डालने वाली है। सवाल यह उठता है कि यह जवाब देही किसकी है। प्रशासन की , पेट्रोल पंप मालिकों की आम जनता की या सभी की इस पर हम लोगों को गहराई से चिंतन करने की जरूरत है। यदि पेट्रोल पंप के हम बाहर देखें तो हेलमेट पहनने वालों की संख्या सीमित है। पिछले माह प्रशासन ने भी इस मामले में सख्ती की थी। इस व्यवस्था को लगातार बनाए रखने की जरूरत है। यदि पहले की तरह पेट्रोल पंपों पर प्रशासन की सहयोग से पुनः सख्ती की जाय तो ट्रैफिक व्यवस्था की सुधार में मदद मिलेगी और दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकेगा। पेट्रोल पंप पर लिखा नो हेलमेट नो पेट्रोल।


