झारखंड में वर्ष 2019 से पहले रजिस्टर्ड चार पहिया वाहन मालिक अपनी कार लेकर यूपी- बिहार सहित अन्य राज्यों में जाने से बच रहे हैं। क्योंकि, कार पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं रहने के कारण दूसरे राज्यों में चालान काटा जा रहा है। रांची के ट्रेवल एजेंसियों की मानें तो दूसरे राज्यों में जाने वाले झारखंड के आैसतन 300 से अधिक वाहनों का चालान हर माह कट रहा है। इसलिए ट्रेवल एजेंसियां अपने पुराने वाहनों को दूसरे राज्यों में नहीं भेज रही हैं। सबसे बड़ी बात है कि वाहन मालिक दूसरे राज्यों की ट्रैफिक पुलिस को दलील दे रहे हैं कि झारखंड में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लग रहा है, फिर भी पुलिस नहीं मान रही है। ऑनलाइन चालान काट दिया जा रहा है। 5000 रुपए का चालान कटने से परेशान वाहन मालिक अपनी कार से दूसरे राज्य जाने के बजाय भाड़े की कार या बस-ट्रेन से सफर कर रहे हैं। दरअसल, झारखंड में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का मामला विवादों में फंसा हुआ है। परिवहन विभाग ने जिस एग्रोस इंपेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को यह काम दिया था, उसके खिलाफ मोटर व्हीकल सिक्योरिटी एसोसिएशन हाईकोर्ट चला गया। एसोसिएशन ने मनोनयन के आधार पर कंपनी को हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठेका देने में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसके बाद अदालत ने परिवहन विभाग द्वारा दिए गए वर्क ऑर्डर पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। फिलहाल यह मामला अदालत में है। परिवहन विभाग के अधिकारी यह मामला कोर्ट में होने का हवाला देकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। रांची में 10 लाख से अधिक वाहनों पर नंबर प्लेट लगना है, पर मामला कोर्ट में रांची सहित राज्यभर में 2019 से पहले के 49 लाख से अधिक वाहन हैं। रांची में 10 लाख से अधिक वाहनों पर नंबर प्लेट लगना है। उसमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए परिवहन विभाग ने मनोनयन के आधार पर एग्रोस इंपैक्ट इंडिया कंपनी को काम दे दिया। कंपनी द्वारा नंबर प्लेट लगाने का काम शुरू किया गया था। इसी बीच यह मामला अदालत में पहुंच गया। इससे अब किसी भी पुराने वाहन का हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं बन रहा। 2019 से पहले के सभी वाहनों में लगना है हाई सिक्योरिटी नंबर केंद्र सरकार ने वाहन चोरी रोकने आैर चोरी के वाहनों का उपयोग कर होने वाले अपराध पर लगाम लगाने के लिए पूरे देश में एक अप्रैल 2019 से सभी वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का निर्देश दिया। 2019 से पहले रजिस्टर्ड वाहनों में भी इसे लगाना अनिवार्य कर दिया। हालांकि, इसमें राज्यों को छूट दी गई कि वे तय करेंगे कि वाहन डीलर नंबर प्लेट लगाएंगे या किसी एजेंसी के माध्यम से नंबर लगाया जाएगा। 400 करोड़ रुपए का ठेका मनोनयन के आधार पर देने से फंसा मामला एग्रोस इंपैक्ट इंडिया कंपनी को बिना टेंडर किए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठेका दिया गया था। करीब 400 करोड़ रुपए का काम बिना टेंडर दिए जाने पर मोटर व्हीकल सिक्योरिटी एसोसिएशन ने अदालत में याचिका दाखिल करके वर्क ऑर्डर रद्द करने का आग्रह किया। कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की ओर से कंपनी का अनुबंध वर्ष 2012 में समाप्त कर दिया था। इसके खिलाफ कंपनी हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट गई थी। दोनों अदालत ने अनुबंध समाप्त करने के फैसले को सही ठहराया था। इसके बाद भी 400 करोड़ वर्क ऑर्डर मनोनयन के आधार पर देना कई सवाल खड़े कर रहा है। केस स्टडी-2 : अब अपनी कार लेकर राज्य के बाहर नहीं जाते राजेंद्र कुमार कार से बख्तियारपुर गए थे। जाते वक्त रास्ते में वाहन जांच के दौरान पुलिस ने कार रोककर जांच की। सभी कागजात दुरुस्त होने पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं होने के कारण चालान काटने की बात कही गई। राजेन्द्र ने काफी मिन्नत की तब जाकर कुछ लेन-देन करके मामला सलटा। अब उन्होंने अपनी कार से दूसरे राज्यों में जाना बंद कर दिया है। केस स्टडी-1 : लखनऊ जाने वाले रोड पर काट दिया चालान रामस्वरूप मिश्रा अपनी कार से सपरिवार उत्तरप्रदेश गए थे। सुल्तानपुर-लखनऊ रोड पर वाहन जांच के दौरान पुलिस ने उनकी कार रोक ली। वाहन पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं होने पर 5000 रुपए का चालान काट दिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि झारखंड में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जारी नहीं हो रहा है, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं सुना। केंद्र सरकार का आदेश… जिन राज्यों में नियम लागू नहीं, वहां के वाहनों पर जुर्माना नहीं लगेगा, फिर भी दूसरे राज्यों में वसूला जा रहा फाइन


