भास्कर न्यूज | लुधियाना रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) कार्यालय लुधियाना में विजिलेंस रेड के बावजूद अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का आलम जारी है। आम जनता महीनों से लंबित फाइलों के चक्कर लगा रही है, जबकि एजेंटों की फाइलें मिनटों में निपटाई जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बड़े दलाल खुलेआम गाड़ियों के ट्रांसफर और नंबर प्लेट जारी करवाने में दफ्तर के भीतर अधिकारियों के साथ दरवाजा बंद करके डीलिंग करते हैं। आरटीए दफ्तर में कुछ भी नहीं बदला है। विजिलेंस विभाग की छापेमारी के बाद भी दलालों का प्रभाव कम नहीं हुआ। आम जनता की फाइलें लंबित हैं, जबकि एजेंटों की फाइलें प्राथमिकता के साथ निपटाई जा रही हैं। दिल्ली और यूपी नंबर की गाड़ियों के ट्रांसफर के लिए दलाल एक साथ चार-पांच फाइलें लेकर पहुंचते हैं, जिनका काम मिनटों में हो जाता है। कार डीलरों के साथ भी अवैध लेनदेन की खबरें सामने आई हैं। मोहित कुमार नाम के व्यक्ति ने बताया कि वह आधे घंटे से बाहर खड़े थे और क्लर्क विक्रम ने दरवाज़ा बंद कर रखा था। अंदर कुछ एजेंटों की फाइलों पर काम किया जा रहा था। इसी तरह सुनील कुमार ने बताया कि दोपहर 1:30 बजे क्लर्क काम बंद कर चला जाता है, जबकि जनता लाइन में खड़ी रहती है। यहां तक कि कई बार दरवाजा खुलने पर दलाल पहले बाहर निकलते हैं और नए एजेंटों की फाइलें अंदर ली जाती हैं। आम लोगों की फाइलें या तो वापस कर दी जाती हैं या फिर लंबित रखी जाती हैं। क्लर्क नीलम के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल तक 2079 फाइलें भेजी गईं, लेकिन अब तक सिर्फ 30 फाइलें ही अप्रूव हुई हैं। जतिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी 2007 मॉडल कार के लिए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए पिछले साल आवेदन किया था, लेकिन अब तक अप्रूवल नहीं मिला। बस स्टैंड के पास कुछ दलाल 2000 रुपए लेकर फर्जी प्लेटें लगवा रहे हैं, जो ऑनलाइन रिकॉर्ड में नहीं दिखतीं। इसकी वजह से उनके दो बार चालान भी हो चुके हैं। जब आरटीए अधिकारी कुलदीप बावा से पूछा गया कि कैसे खुलेआम 2000 रुपए में नंबर प्लेट जारी हो रही है, तो उन्होंने कहा कि यह काम एक प्राइवेट कंपनी के तहत होता है, और इसका विभाग से कोई संबंध नहीं है। इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ऑफिस में क्लर्क एजेंटो का काम करते हुए। आरटीओ ऑफिस में जनता के लिए दरवाजा बंद।


