भक्त ध्रुव की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने उन्हें तारा बनने का आशीर्वाद दिया था

भास्कर न्यूज|लुधियाना श्री बांके बिहारी लाल जी मंदिर घुमार मंडी में पंडित द्वारिका प्रसाद एवं शकुंतला देवी के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथा व्यास पंडित बलदेव कृष्ण शर्मा ने सबसे ऊंची प्रेम सगाई, दुर्योधन के मेवे त्यागे साग विदुर घर खाई भाव का भूखा हूं, मैं भाव ही एक सा रहे जौ भाव से भजे मुझे तो भव से बेडा पार है गाकर कथा की शुरुआत की। कथा के प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए बुधवार को पं. बलदेव ने कश्यप, दिति, भगवान कपिल देव अवतार, सांख्य योग, देवहूति माता का उपदेश, भक्त ध्रुव का चरित्र, राजा भरत की कथा बताते हुए कहा कि सारा खेल हमारे मन का है। उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी दिति से असुरों की उत्पत्ति मानी जाती है। दिति ने महर्षि कश्यप से एक शक्तिशाली पुत्र की कामना की, जिसके फलस्वरूप हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप का जन्म हुआ। ये दोनों असुरों ने अत्यंत तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किए और तीनों लोको में आतंक मचाया। हिरण्याक्ष का वध भगवान वराह ने किया, जबकि हिरण्यकश्यप का वध भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की भक्ति के कारण किया। वहीं, भक्त ध्रुव महर्षि कश्यप के वंश में उत्पन्न महान भक्त थे। बाल्यकाल में अपनी सौतेली माता से अपमानित होकर उन्होंने कठोर तपस्या की और भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। भगवान ने उन्हें ध्रुव तारा बनने का आशीर्वाद दिया, जो आज भी आकाश में अडिग और अचल रूप में विद्यमान है। संसार में रहते हुए हम संसार के मोह माया में फंसकर परमात्मा से संसार की ही चीजें मांगते है। अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए शुभ कर्म करते हुए इस जीवन को पार लगाए। उन्होंने कहा कि आज इस कथा को सुनने भी जो श्रद्धालु यहां पहुंचे है वो भी उन पर परमात्मा की कृपा है तभी इस कथा को श्रवण कर रहे है। इस दौरान सुंदर भजनों से श्रद्धालुओं को निहाल करते हुए आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *