रिम्स का सेंट्रल लैब 30 दिनों में करने लगेगा काम, सैंपल कलेक्शन से लेकर मिलेगी रिपोर्ट तक, बिलिंग काउंटर भी

रिम्स में पुराने सैंपल कलेक्शन काउंटर के बगल में बन कर तैयार सेंट्रल लैब 30 दिनों के भीतर फंक्शनल हो जाएगा। यहां एक ही जगह पर भर्ती मरीज व ओपीडी के रोगियों के सैंपल कलेक्शन लिए जाएंगे। जांच के बाद सेंट्रल लैब के काउंटर से ही रिपोर्ट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यहीं नहीं जांच की बिलिंग के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था भी यहीं होगी। ये जानकारी रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने दी। उन्होंने बताया कि बुधवार को सेंट्रल लैब को शुरू कर कार्यशील बनाने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की गई। बैठक में प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार, पैथोलॉजी के एचओडी, बायोकेमेस्ट्री के एचओडी, लैब मेडिसिन के एचओडी, ट्रॉमा लैब के एचओडी समेत अन्य शामिल थे। बैठक में चर्चा हुई कि कैसे कम लागत के साथ सेंट्रल लैब की शुरूआत की जा सकती है? सामान तो काफी कुछ ऑर्डर किए जा चुके हैं, कुछ ऑर्डर में इन्क्वायरी जारी है, लेकिन जांच तो अभी भी रिम्स में हो ही रही है। कैसे जल्द से जल्द वो नेटवर्क बनाया जाए जिससे जांच के लिए सभी सैंपल यहां से विभागों तक पहुंच सके। इन बिंदुओं पर गंभीरता से चर्चा की गई। अभी होती है ये परेशानी: वर्तमान में रिम्स में भर्ती मरीज या ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों को जांच लिखने के बाद अलग-अलग विभाग व लैब के चक्कर काटने होते हैं। कोई जांच पुराने बिल्डिंग स्थित माइक्रोबायोलॉजी लैब के कमरा नंबर 220 में होता है, कुछ जांच 216 नंबर में। कुछ जांच बायोकेमेस्ट्री लैब में, कुछ ट्रॉमा सेंटर के लैब में… ऐसे में मरीज के परिजनों को पूरे रिम्स में घूम-घूमकर सैंपल पहुंचना होता है। इसके बाद रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा इन विभागों में जाना होता है। सेंट्रल लैब में मिलेंगी ये सुविधाएं 1.अलग-अलग चार-पांच काउंटर बनाये गए हैं। बिलिंग से लेकर सैंपल कलेक्शन और रिपोर्ट देने की व्यवस्था होगी। 2.इंडोर या आउटडोर मरीजों को सैंपल देने के लिए अलग-अलग लैब और विभाग के चक्कर नहीं लगाने होंगे। 3.सैंपल देने के 4 से 6 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध करा दिए जाएंगे। धीरे-धीरे मोबाइल पर जानी शुरू होगी रिपोर्ट निदेशक डॉ. राजकुमार ने बताया कि सेंट्रल लैब के फंक्शनल होते ही मरीजों के मोबाइल में रिपोर्ट भेजने की शुरूआत की जाएगी। सभी सैंपलों में बारकोड लगाया जाएगा, जिससे सैंपल की पहचान में मदद मिलेगी और सही व्यक्ति को रिपोर्ट मिल सकेगी। एक वेबसाइट तैयार कर सभी रिपोर्ट अपलोड किए जाएंगे, बारकोड के माध्यम से वह रिपोर्ट आसानी से मोबाइल में डाउनलोड किया जा सकेगा। फिलहाल इसकी व्यवस्था रिम्स में नही है।

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