प्रदेश के नगरीय निकायों में चार हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के भवन, मकान, कांप्लेक्स के निर्माण हुए हैं लेकिन इसके एवज में काटे गए सेस के 21.86 करोड़ रुपए अभी तक सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के खाते में जमा नहीं कराए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को नोटिस जारी कर मंडल के खाते में राशि अतिशीघ्र जमा करने के निर्देश दिये हैं। यह भी कहा गया है कि यदि समयसीमा के भीतर राशि जमा नहीं कराई गई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम के तहत भवन और निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए धन जुटाने के लिए उपकर लगाया जाता है। उपकर की दर निर्माण लागत का एक फीसदी है। नियम के मुताबिक सेस का भुगतान निर्माण पूरा होने से पहले या निर्माण पूरा होने के बाद किया जाता है। भास्कर एक्सक्लूसिव – जमा करने में देरी पर प्रतिमाह दो तो सालाना 24 फीसदी ब्याज
नियम के मुताबिक निर्माण कार्यों से काटी गई राशि का भुगतान 30 दिन के भीतर करना जरूरी है लेकिन यदि समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता तो भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के नियम के मुताबिक दो प्रतिशत मासिक तथा सालाना 24 फीसदी की दर से भुगतान करना होगा। इसका भुगतान मार्च 2025 तक करना था लेकिन निकायों ने पहले ही इसे दाे माह लेट कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य पर होता है खर्च
सेस से मिलने वाली राशि का उपयोग भवन और निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और कौशल विकास जैसी योजनाओं पर खर्च की जाती है। क्या है उपकर या सेस
भवन निर्माण में एक फीसदी सेस का मतलब है कि भवन निर्माण लागत का 1% उपकर या टैक्स जमा करना होता है। यह उपकर भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 के तहत लगाया जाता है। सेस किसी विशेष उद्येश्य, सेवा या क्षेत्र को विकसित करना होता है। अर्थात सेस किसी जन कल्याण के कार्य के लिए वित्त की व्यवस्था करना होता है। यह उपकर मुख्य रूप से भवन और निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए होता है। निकायों में चार हजार करोड़ का निर्माण
प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में लगभग चार हजार 297 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य कराए गए हैंं। इसके एवज में निकायों ने सेस के रूप में 42 करोड़ 48 लाख 32 हजार रुपए की राशि काटी गई है। इसमें से 20 करोड़ 61 लाख रुपए अब तक कर्मकार कल्याण मंडल के पास जमा कराए गए हैं जबकि 21 करोड़ 86 लाख रुपए अभी तक बकाया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि यदि राशि जमा करने में देरी की गई तो कार्रवाई की जाएगी।


