केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले ढ़ोड़न बांध के डूब में होने के कारण छतरपुर के ढ़ोड़न, खरियानी, सुकवाहा और पलकौहां गांव भी डूब जाएंगे। इन गांवों के किसानों के पास केन नदी की तराई में कृषि भूमि है। 2.5 हजार एकड़ यह कृषि भूमि बेहद उपजाऊ है। किसान खुद को इस जमीन का मालिक समझते हैं लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में मालिकाना हक दर्ज नहीं है। इस कारण एसडीएम बिजावर ने इन तीनों गांवों के किसानों को तराई की कृषि भूमि का मुआवजा नहीं देने का फैसला किया है। विस्थापितों के आवास की कीमत और नए आवासीय पैकेज के निर्धारण में ग्रामीणों ने अधिकारियों को अनियमितता और भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। ढा़ेड़न के राममिलन यादव की 30 एकड़ पैतृक कृषि भूमि है। अब यह भूमि ढ़ोड़न बांध में पूरी तरह से डूब जाएगी, लेकिन उन्हें एक एकड़ भूमि का भी मुआवजा नहीं मिलेगा। राममिलन बताते हैं कि उनके पूर्वज अनपढ़ थे। इस कारण आजादी के बाद किसी ने जमीनों के पट्टा बनवाने प्रयास नहीं किया। 1975 में गंगऊ अभयारण्य का गठन किया गया। इसके बाद किसानों को उनकी जमीनों पर पट्टे देने पर ही रोक लगा दी गई। यही हाल ढ़ोड़न के साथ ही खरियानी, पलकौहां और सुकवाहा गांव के किसानों का है। छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया कि 12.50 लाख के मुआवजा पैकेज के लिए सूचियां तैयार हो गई हैं। दावा आपत्तियों के बाद भुगतान दिया जाएगा। यदि किसी को आवास का मुआवजा कम दिया गया है तो उसका लोक निर्माण विभाग की टीम भेजकर फिर से निर्धारण कराया जाएगा। पैकेज के लिए सूचियों काे अब तक अंतिम रूप नहीं विस्थापित होने वाले हर परिवार को विस्थापन पैकेज दिया जाना है। हर परिवार को 12 लाख 50 हजार रुपए का मुआवजा पैकेज दिया जाना है, लेकिन अब तक पैकेज वितरण शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि हर विवाहित जोड़े और अविवाहित युवक (18 वर्ष से अधिक उम्र) को मुआवजा पैकेज दिया जा रहा है, लेकिन लड़कियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने लड़कों की तरह हर वयस्क लड़की को भी एक पारिवारिक यूनिट मानते हुए मुआवजा पैकेज का निर्धारण करने की मांग की है। आवास कीमत का मुआवजा मात्र 13 हजार विस्थापन कार्य में अधिकारी जमकर मनमानी कर रहे हैं। हर परिवार को उनके घर की कीमत के एवज में राशि का आकलन करके मुआवजा दिया जा रहा है। ढ़ोड़न गांव के हृदेश यादव को आवास कीमत का मुआवजा मात्र 17 हजार रुपए दिया गया है। इसी प्रकार भागीरथ और मुकेश यादव को 57-57 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया है। अभी 20 फीसदी लोगों को ही उनके घरों की कीमत का मुआवजा दिया गया है। 80 फीसदी ग्रामीणों को मुआवजा दिया ही नहीं गया है। छतरपुर जिले के 14 गांव होंगे विस्थापित छतरपुर जिले के भरकुआं, ढोड़न, खरियानी, कुपी, मैनारी, पलकोंहा, शहपुरा, सुकवाहा, पाठापुर, नैगुवां, डुंगरिया, कदवारा, घुघरी और बसुधा गांव को विस्थापित किया जाना है। कुपी और शहपुरा गांव आंशिक रूप से विस्थापित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार पन्ना जिले के गहदरा, कटहरी बिलहटा, मझौली, कोनी, डोंडी, खमरी, कूडऩ, मरहा, ललार, रमपुरा, जरधोबा और कंडवाहा गांव विस्थापित किए जाएंगे। ढ़ोड़न गांव में ग्रामीण करीब 1050 एकड़ जमीन पर कृषि कर रहे हैं, लेकिन मुआवजा का वितरण सिर्फ 42 एकड़ कृषि भूमि के एवज में ही किया गया है।


