एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शिकायतों की जांच को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ताजा मामला स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में डॉक्टरों की नियुक्ति का है। इसकी शिकायत डेढ़ साल पहले हुई थी, लेकिन जांच अब तक चल रही है। समिति जांच रिपोर्ट देने को तैयार नहीं है। एमवायएच की नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति रावत की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट अब तक जमा नहीं की। शिकायतकर्ता कमल गोस्वामी ने इसकी शिकायत की थी।
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में बिना आवेदन, योग्यता को लेकर सवाल खड़े करते हुए शिकायत एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित, चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को की गई थी। डॉ. दीक्षित ने जांच समिति गठित कर दी। वे रिटायर भी हो गए, लेकिन उनकी कमेटी ने अब तक जांच पूरी नहीं की है। इस मामले में राज्य स्तरीय समिति भी गठित हुई है, लेकिन वहां की जांच भी पूरी नहीं हुई है। डॉ. रावत की अध्यक्षता में डॉ. अशोक ठाकुर, प्रशासनिक अधिकारी नेहा सिंघई की टीम बनाई गई।
जांच में गड़बड़ी का आरोप
भोपाल से स्वास्थ्य संचालक डॉ. अरुण श्रीवास्तव की टीम भी इंदौर आई। सभी दस्तावेज मांगे गए। दोबारा डॉ. रावत को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जांच करने में गड़बड़ी की जा रही है। कई बार मेरे बयान हुए। दस्तावेज दिए। बावजूद मुझे अब तक यह नहीं बताया गया कि जांच रिपोर्ट का स्टेटस क्या है।


