भाजपा संगठन चुनाव:जामवाल- हितानंद ने दिल्ली में मप्र के सांसदों से लिया फीडबैक

आज बैठक में तय होगा संगठन चुनाव प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी भाजपा में संगठन चुनावों की अगली कड़ी में जिलाध्यक्षों और प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की कवायद शुरू होने वाली है। सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री ​शिवप्रकाश ने बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें चुनाव की ऑब्जर्वर सरोज पांडे भी रहेंगी। इसके अलावा बैठक में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद, प्रभारी महेंद्र सिंह व सतीश उपाध्याय भी रहेंगे। इस बैठक में चुनाव की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी, यह तय किया जाएगा। इस बीच हितानंद और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने दिल्ली में मप्र के सांसदों के साथ अलग बैठक की है।
मप्र भवन में हुई इस बैठक में मप्र में सत्ता और संगठन का फीडबैक व चुनाव का ओपिनियन भी लिया गया है। साथ ही सांसदों से उनके कामकाज के बारे में बात की। इस बैठक में वीडी शर्मा नहीं थे। बताया गया कि उन्हें पार्टी के काम से खजुराहो जाना पड़ा। बहरहाल, बैठक 19 और 20 दिसंबर को अलग-अलग रखी गई थी, जिसमें मप्र से लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को बुलाया गया।
सभी से संगठन नेताओं ने एक-एक करके बात की। संगठन चुनाव के बीच इस बैठक को भी अहम माना जा रहा है। इधर, सोमवार को बैठक दोपहर दो बजे से पार्टी दफ्तर में रखी गई है। सांसदों से पूछे गए यह सवाल आपके क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों का कामकाज और आपके साथ समन्वय कैसा है?
संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ व्यवहार या कमियां क्या हैं? जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष से पूछा जा रहा है या नहीं।
सांसद निधि को किसने कितना और कैसे खर्च किया? (ज्यादातर सांसदों ने बताया कि वे सामुदायिक भवन और विश्राम घाट को ठीक करने के लिए पैसा खर्च कर रहे हैं।)
संगठन का सदस्यता अभियान का फीडबैक क्या है?
आप लोगों (सांसद) का अपने क्षेत्र में प्रवास कितना है?
अटल जी को लेकर सुशासन वाला अभियान की तैयारी?
केंद्र और राज्य की विकास से जुड़ी योजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए बने दिशा कार्यक्रम की सफलता क्या है? जिलाध्यक्ष के चयन में सांसदों की राय होगी अहम
दिल्ली में सांसदों से हुई संगठन के नेताओं की चर्चा व फीडबैक का इस्तेमाल पार्टी का जिलाध्यक्ष चुनते समय हो सकता है। सांसदों ने इस बारे में अपनी राय दी है। ऐसे संकेत हैं कि कुछ बड़े जिलों के जिलाध्यक्षों को रिपीट किया जा सकता है। बड़े नेताओं के कुछ सिफारिशी नाम भी हैं, जिन पर भाजपा आलाकमान को सहमति के साथ एक नाम पर मुहर लगानी होगी।

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