कैथोलिक आर्च डायसिस ने कलीसिया के लिए निर्देश जारी किए है। यह निर्देश आर्चबिशप विंसेंट आइंद ने जारी िकया है। जिसमें नवनियुक्त पोप लियो के लिए हर पल्ली चर्च में विशेष मिस्सा बलिदान प्रार्थना करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा मिस्सा बलिदान के दौरान यूख्रीस्तीय प्रार्थनाओं में पोप के लिए मध्यस्थता को जोड़ने, पीले और सफेद रंग का झंडा पल्ली के चर्च व धार्मिक स्थलों के अलावा घरों के बाहर लगाने, पोप के लिए रोजरी प्रार्थना करने की बात कही गई हैं। आर्चबिशप ने कहा कि हम इस ऐतिहासिक और धन्य समाचार पर प्रसन्न हैं कि पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में कार्डिनल्स के कॉलेज ने सार्वभौमिक चर्च का नेतृत्व करने के लिए एक नए सर्वोच्च पोप का चुनाव किया है। हमारे पास एक पोप है। पल्ली पुरोहित फादर आनंद डेविड खलखो ने बताया कि नए पोप चुन लिए जाने को लेकर संत मरिया महागिरजाघर में रविवार को धन्यवादी मिस्सा का आयोजन किया जाएगा। साथ ही बिशप हाउस और महागिरजाघर के मुख्य द्वार पर वेटिकन झंडा का तोरण बनाया जाएगा और पोप का झंडा फहराया जाएगा। सिमडेगा से सिस्टर सबीना डुंगडुंग ने चुनाव के बाद पहले दिन नए पोप लियो से मुलाकात की। वह पहली भारतीय आदिवासी हैं, जिन्होंने नए पोप लियो 14वें से मुलाकात की। पोप ने उनसे 8 मिनट तक बात की, जिसमें उनके जीवन, उनके देश और उनकी सेवाओं के बारे में चर्चा हुई। सिस्टर सबीना डुंगडुंग सांता मार्ता घर में अपनी सेवाएं देती हैं, जहां पोप फ्रांसिस रहते थे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नए पोप लियो 14वें बहुत ही सरल और दयालु हैं। उनकी सहृदयता और मिलनसारिता ने मेरा दिल जीत लिया। मैं उनसे बात करके बहुत खुश और सम्मानित महसूस कर रही हूं। इस मुलाकात ने न केवल सिस्टर सबीना के लिए बल्कि पूरे झारखंड के लिए ऐतिहासिक पल बना दिया। रोम से फादर सुशील टोप्पो 9 मई को पोप लियो 14वें ने रोम के सिस्टीन चैपल में कार्डिनल्स के साथ पहला मिस्सा संपन्न किया। अपने प्रवचन में अमेरिका में जन्मे पोप ने मसीही के प्रति व्यक्तिगत संबंध को गहरा करने का आह्वान किया और चेताया कि जहां आस्था नहीं होती, वहां जीवन का अर्थ खो जाता है। उन्होंने कार्डिनलों से आह्वान किया कि वे सुसमाचार का प्रचार करते हुए मसीही में विश्वास की खुशी को साझा करें। पोप लियो ने संत पतरस के शब्द तू मसीही है, जीवित परमेश्वर का पुत्र को उद्धृत करते हुए चर्च की दो हजार साल पुरानी परंपरा की याद दिलाई। उन्होंने आज की दुनिया में आस्था के प्रति उपेक्षा को चिह्नित करते हुए कहा कि ऐसे स्थानों में गवाही देना और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने मिशनरी सेवा, व्यक्तिगत रूपांतरण और मसीही में विश्वास की नित्य यात्रा को चर्च की प्राथमिकता बताया। प्रार्थना की कि वे मसीही के लिए स्वयं को न्यौछावर कर सकें और उनके माध्यम से चर्च को नेतृत्व प्रदान करें।


