भास्कर न्यूज|लुधियाना लुधियाना के गुरुद्वारा गुरु ज्ञान प्रकाश जवद्दी टकसाल में 350वें वार्षिक शहीदी शताब्दी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें गुरु दिवस को समर्पित तीन दिवसीय विश्व सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस आयोजन का शुभारंभ गुरु शब्द संगीत अकेडमी के भाई भरत सिंह के कीर्तन जत्थे द्वारा शबद कीर्तन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुलखन सिंह और डॉ. चेतन सिंह ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. सुखपाल कौर और हरप्रीत कौर ने संभाला। मुख्य अतिथि गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के वाइस चांसलर प्रो. करमजीत सिंह ने सिख शहादत की परंपरा और गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान पर गहन विचार रखे। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का बलिदान न केवल सिख इतिहास में बल्कि मानवता के लिए एक प्रेरणास्रोत है। इस मौके पर डॉ. महिंदर सिंह, डायरेक्टर, भाई वीर सिंह साहित्य सदन, नई दिल्ली ने मुगल साम्राज्य के आध्यात्मिक संकट और गुरु साहिब की शहादत के बीच के संबंध को स्पष्ट किया। विशेष संबोधन में डॉ. अनुराग सिंह ने ऐतिहासिक पुस्तकों और विद्वानों के हवाले से शहादत की गहराई को समझाया। सम्मेलन में डॉ. चेतन सिंह, डॉ. जगमोहन सिंह गिल (डायरेक्टर, भाषा विभाग), डॉ. राजविंदर सिंह जोगा, प्रिंसिपल डॉ. बलजीत सिंह गिल, डॉ. निर्मल जौड़ा, डॉ. अमरजीत सिंह, सरदार चरणजीत सिंह, सतनाम सिंह कोमल, डॉ. अमृत कौर, डॉ. सुरजीत कौर, रूपिंदर पाल सिंह, प्रो. अंगरीश मुहम्मद सहित कई विद्वानों ने विचार रखे। रामगढ़िया एजुकेशन काउंसिल, लुधियाना के प्रधान सरदार रणजोध सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद इस भव्य आयोजन के लिए जवद्दी टकसाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित विद्वानों का स्वागत किया और उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर की पूर्व प्रमुख डॉ. मदनजीत कौर को विशेष सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साथ ही विभिन्न कॉलेजों से आए प्रिंसिपलों को भी सम्मानित किया गया। सम्मेलन के पहले दिन चिंतन और साधना का संगम देखने को मिला, जिसमें सिख इतिहास और शहादत की महान परंपरा पर गहन विचार-विमर्श हुआ। आयोजकों ने बताया कि अगले दो दिन तक विचार गोष्ठियों और संगत के साथ संवाद का दौर जारी रहेगा।


