भास्कर न्यूज | जामताड़ा जिले के छह प्रखंड के जंगलों की निगरानी अब एआई आधारित सिस्टम से िकया जाएगा। इससे जंगलों में आग लगने, अतिक्रमण या पेड़ों की कटाई होने पर वन विभाग को तुरंत जानकारी िमलेगी। इसके लिए वन विभाग मध्य प्रदेश सिस्टम का अध्ययन कर रही है। झारखंड में अभी इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत फिर बाद मे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है। हालांकि यह सिस्टम लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहां रियल-टाइम फॉरेस्ट अलर्ट सिस्टम” लागू किया गया है। यह एआई आधारित सिस्टम सैटेलाइट इमेज, मशीन लर्निंग और फील्ड फीडबैक पर काम करता है। झारखंड में वन विभाग और रेलवे ट्रैक पर हाथियों की निगरानी करता है। अगले चरण में इसी सिस्टम से जंगल में आग तथा इसके बाद पूरे वन क्षेत्र की निगरानी इस सिस्टम से होगी। जामताड़ा जिले में जंगलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। वहीं दूसरी और लगातार जंगली क्षेत्र में कमी आ रही है। जामताड़ा के घने जंगल वाला क्षेत्र अब ओपन फॉरेस्ट में बदलता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो ओपन फॉरेस्ट उन जंगली क्षेत्र को माना जाता है जहां कुल क्षेत्रफल का 10 से 40% की जंगल हो। सर्वे के अनुसार जामताड़ा जिले में 11 हजार 590 हेक्टेयर क्षेत्र में जंगल है। यही कारण है कि वन विभाग लगातार जंगल लगाने का प्रयास कर रही है। ऐसे काम करेगा एआई सिस्टम, विभाग को करेगा अलर्ट सिस्टम से जुड़े झारखंड के अधिकारियों के अनुसार यह क्लाउड बेस्ड सिस्टम गूगल के सर्वर से सीधे इमेज एक्सेस कर अलर्ट जनरेट करता है। पहली बार सैटेलाइट, एआई और फील्ड फीडबैक को एक सिस्टम में जोड़ा गया है। इससे निगरानी न सिर्फ मजबूत होगी, बल्कि तुरंत कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। यह सिस्टम 10×10 मीटर के क्षेत्र में होने वाले बदलाव को पहचानता है। जैसे ही जंगल में फसल बोई जाती है, निर्माण होता है या जमीन के उपयोग में बदलाव आता है, तुरंत डीएफओ के पास अलर्ट पहुंचेगा। वहीं से बीट गार्ड को जांच के निर्देश मिलते हैं। रेंजर के अनुसार, यह सिस्टम गूगल अर्थ इंजन से ली गई सैटेलाइट इमेज का उपयोग करता है। बीट गार्ड को मौके से चारों दिशाओं की तस्वीरें भेजनी होंगी, जिससे अधिकारियों की निगरानी सटीक और तेज होगी।


