भास्कर न्यूज | अमृतसर न्यू अमृतसर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही कथा रविवार को समाप्त हो गई। जिसमें अयोध्या धाम से पधारे आचार्य कुरेशाचार्य महाराज ने सुदामा चरित्र प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि संसार में मित्रता श्री कृष्ण और सुदामा जैसी होनी चाहिए। जैसे सुदामा के आने की खबर मिलने पर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल से पग धोए, अर्थात श्री कृष्ण अपने सखा सुदामा के आगमन पर उनके पैर धोने के लिए पानी मंगवाया। परंतु सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतना दुख हुआ है कि प्रभु के आंसुओं से ही सुदामा के पैर धुल गए। महाराज ने कहा कि आज के आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक-दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर भूल जाते हैं। जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनाना चाहिए। भगवान से बनाया गया रिश्ता जीव को मोक्ष की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सखा कृष्ण का चिंतन और स्मरण नहीं छोड़ा। इसके फलस्वरूप कृष्ण ने भी सुदामा को परम पद प्रदान किया। कथा के अंत में पंडितों ने मंत्रोच्चारण करके यज्ञशाला की पवित्र अग्नि में आहुतियां डलवाई। इस मौके पर महासचिव अरुण खन्ना, गुलशन कोहली, रमन सहगल, दीपक चतरथ, मनमोहन गुप्ता, राजीव वांसल, पवन साबू समेत कई भक्त मौजूद थे।


