संजय गोस्वामी | बिंदापाथर फतेहपुर प्रखंड के करजोरी पंचायत अंतर्गत रायटोला में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है। टोले में लगे तीन चापाकल में से एक भी चालू अवस्था में नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरन डोभा, जोरिया का पानी पीने के लिए इस्तेमाल करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण श्यामलाल राय, सोनामुखी हेंब्रम, किसना हांसदा, मनोज कुमार हेंब्रम और बाहामुनी पावरिया ने बताया कि टोले में पहले तीन चापाकल लगे थे, लेकिन समय-समय पर वे खराब होते गए। ग्रामीणों ने खुद खर्च उठाकर कई बार मिस्त्री से मरम्मत करवाई, लेकिन अब बार-बार खर्च करना उनके लिए संभव नहीं रह गया है। टोला में लगभग 45 घर है जिसकी आबादी लगभग 300 के आसपास है। आज भी यहां के लोग पेयजल संकट झेलने पर मजबूर है। एक किलोमीटर से अधिक दूर जाकर डोभा से पानी लाना पड़ता है ग्रामीणों के अनुसार, विगत कई सप्ताह से महिलाएं और बच्चियां सुबह-शाम डोभा, जोरिया और नदी से पानी भरकर ला रही हैं। यह पानी न तो शुद्ध है और न ही सुरक्षित। इससे जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका भी बनी हुई है, लेकिन विकल्प के अभाव में लोग मजबूरी में उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं। गांव की महिला सोनामुखी हेंब्रम ने बताया कि हर दिन हमें एक किलोमीटर से अधिक दूर जाकर डोभा से पानी लाना पड़ता है। गर्मी में यह काम और भी कठिन हो गया है। किसना हांसदा ने कहा कि हमने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभागीय कर्मियों से इसकी शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। गांव में स्थापित चारमीनार भी बेकार पड़ा हुआ है। जल्द चापाकलों की मरम्मत कराने की मांग गौरतलब है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या आम होती जा रही है। पुराने चापाकल खराब हो जाते हैं और नए की व्यवस्था नहीं हो पाती। ऐसे में ग्रामीणों को पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य संकट भी गहराता है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि शीघ्र ही चापाकलों की मरम्मत करवाई जाए या वैकल्पिक पेयजल स्रोत की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।


