अपेक्षा और उपेक्षा से खुशी कम हो रही है, अहंकार से हो रहा नुकसान

भास्कर न्यूज | बालोद रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय आत्मज्ञान भवन आमापारा में मातृ दिवस मनाया। बीके विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि आज परिवार टूट रहे हैं। समाज की स्थिति भी चिंताजनक है। चारों ओर विकार और व्यसन की कालिमा छाई हुई हैं। लोग हेल्थ और वेल्थ के साधनों को जानते हैं, पर अपेक्षा और उपेक्षा से खुशी कम हो रही है। यदि हम दूसरों की कमजोरियों को न देखकर उनकी विशेषताओं को देखें, तो जीवन में खुशी मिलेगी। सुख-शांति के लिए जीवन में मूल्यों को अपनाना जरूरी है। परिवार को सशक्त बनाने के लिए राजयोग जरूरी है। मूल्य हमारे जीवन को दिशा देते हैं और हमें सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करते हैं. जब हम मूल्यों के अनुसार जीते हैं, तो हम न केवल खुद को बल्कि दूसरों को भी खुश कर सकते हैं। जीवन में सुख-दुख का आना-जाना बना रहता है। हमें सुख मिलेंगे या या दुख, ये हमारे कर्मों पर ही निर्भर करता है। जाने-अनजाने में किए गए गलत कामों का फल देर ही सही लेकिन दुखों के रूप में जरूर मिलता है। इसलिए ऐसे कामों से बचना चाहिए जो धर्म के अनुसार सही नहीं हैं। अहंकार यानी सिर्फ खुद को श्रेष्ठ समझना। सुंदरता, योग्यता, घर-परिवार, धन-संपत्ति के अहंकार से बचें। अहंकार किसी भी बात को हो, नुकसानदायक ही है। जीवन से प्रेरणा देने वाली मातृशक्ति ही है: सरिता बीके सरिता दीदी ने कहा कि माता अपनी जीवन से प्रेरणा दे सकती है सिर्फ शब्दों से ही नहीं शब्दों से कहने वाला सारा संसार बैठा है लेकिन जीवन से कहने वाले जिनके जीवन में ऊंची विशेषता है उससे सीखने वाले प्रेरणा देने वाली हमारी मातृशक्ति है इसलिए भगवान ने बहनों माताओं को आगे रखकर के अपने जीवन को चरित्रवान ऊंचा महान बनाते हुए औरों के जीवन को भी ऐसा बनाना ये जिम्मेदारी मातृशक्ति के ऊपर है। भगवान ने माताओं को आगे रखकर उन्हें ऊंचा और चरित्रवान जीवन जीने की जिम्मेदारी दी है। इस दुनिया में प्यारा शब्द है मां, जिसे पुकारते ही याद आती है वह गोद जिस में विश्राम, आराम, शांति-प्रेम-करुणा सभी मिलते है। मां जीवित हो या अपनी जीवन यात्रा पूरी करके परलोक सिधार चुकी हो, उनके साथ बिताये बचपन के दिन जीवन जीने की प्रेरणा शक्ति देते हैं। मां जीवन में हर परिस्थिति से लड़ने के लिए सिखाती है सरस्वती टेमरिया ने कहा कि मां शब्द बहुत बड़ा है। मां भगवान का रूप है। मां बच्चों से प्रेम करती है, उन्हें अच्छे-बुरे की सीख देती है। मां जीवन में हर परिस्थिति से लड़ना सिखाती है। पार्षद पुष्पा साहू व गीता ठाकुर ने कहा कि माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी दुआ है, जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मां गर्भ से लेकर जब तक बालक की विद्या पूरी न हो, तब तक आशीर्वाद देती है।

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