भास्कर न्यूज| महासमुंद महासमुंद नगर के शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में चतुर्थ सेमेस्टर के समस्त छात्र-छात्राओं के लिए सोमवार को एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय ग्रामीण विकास में स्थानीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा किया गया। विषय विशेषज्ञ डॉ. अरुणा ठाकुर ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास में स्थानीय संस्थाओं का भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय शासन वह स्थिति है जब स्थानीय स्तर पर चुने हुए प्रतिनिधि अपने समस्याओं का समाधान खुद ही करते है। स्थानीय स्वशासन के बारे में जानकारी देते हुए कहा की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का भारत बनाने के लिए स्थानीय संस्थाओं को ज़्यादा से ज़्यादा अधिकार देने होंगे। साथ ही महिलाओं को नेतृत्व में आगे आने मेहनत करने कहा। आज के दिन में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बड़ रहे है। गांवों के विकास के लिए संस्थाओं के भूमिका महत्वपूर्ण होती है। किसी भी गांव के विकास के लिए वहां के स्थानीय जो संस्थाएं है वे गांवों की आवश्यकता के अनुसार विकास की दिशा में कार्य करते है। स्थानीय संस्थाओं को गांवों का दशा दिशा की पूरी जानकारी होती है वे कुछ भी निर्णय लेते है तो उसमें गांव का हित छिपा रहता है। गांव के विकास के बारे में सदैव विचारशील होते है स्थानीय संस्थाएं। ग्रामीण विकास में स्थानीय संस्थाएँ, जैसे कि ग्राम पंचायतें, सहकारिता समितियाँ, और स्वयं सहायता समूह, महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये संस्थाएं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास योजनाओं को लागू करने, बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने, और स्थानीय लोगों को सशक्त बनाने में मदद करती हैं। सहकारिता समितियां ग्रामीण विकास में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे किसानों को ऋण, कृषि उपकरण, और बाजार तक पहुंच प्रदान करके उनकी आय बढ़ाने में मदद करती हैं। एसएचजी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये समूह महिलाओं को बचत करने, ऋण प्राप्त करने, और व्यवसाय शुरू करने में मदद करते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इस अवसर पर चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थी मौजूद थे।


