ब्लैकआउट के चलते इन्वर्टर बैटरियों की डिमांड 70 प्रतिशत बढ़ी

छेहर्टा पुरानी चुंगी स्थित इंडस्ट्री इस्टेट में अमर बैटरी बनाने वाली फैक्टरी के मालिक सरबजीत सिंह और सुरिंदर सिंह का कहना है कि गर्मी नहीं बल्कि ब्लैकआउट के बैटरियों की डिमांड बढ़ी। एक माह में जहां 50 से 60 बैटरियां बिकती थी वहीं 2 दिन में करीब 150 बिकी मगर उन्होंने रेट नहीं बढ़ाए। वहीं डिमांड बढ़ने से प्रोडक्शन नहीं हो पा रही। सरबजीत का कहना है कि प्रवासी लेबर के घर चले जाने से मात्र 5 कर्मी बचे हैं जबकि रॉ मैटीरियल आने में अभी एक सप्ताह का समय लगेगा। भास्कर न्यूज | अमृतसर भारत-पाक के बीच तनावपूर्ण स्थिति के चलते लग रहे ब्लैकआउट के कारण इन्वर्टर बैटरियों की डिमांड 70 प्रतिशत बढ़ गई। गर्मी के कारण लोगों को रात में बिना पंखे और एसी के सोना मुश्किल हो रहा था। कई परिवारों ने नई इन्वर्टर बैटरियां खरीदीं क्योंकि रोजाना 7 से 8 घंटे के ब्लैक आउट के कारण कोई भी बैटरी ज्यादा समय नहीं निकाल पा रही थी। आपात कालीन हालात देखते बैटरियां बनाने वाली फैक्टरी में काम करने वाले प्रवासी मजदूर रातों रात काम छोड़कर घर चले गए। लेबर की कमी और अब रॉ मैटीरियल की शॉटेज आने से नई बैटरियां नहीं बन पा रही, जिसके कारण शहर की करीब 2 हजार दुकानों में बैटरियों की शॉटेज आ गई है। जिन दुकानदारों के पास कुछ बैटरियां पड़ी है उन्होंने रेट बढ़ा दिए हैं। जिस दुकान में पहले 5 से 10 बैटरियां बिकती थी अब वहां रोजाना 30 से 40 बैटरी बिक रही हैं। ब्लैकआउट के कारण बैटरियों की डिमांड 70 प्रतिशत बढ़ गई है पर अब माल की शॉटेज हो गई है। हाल गेट में बैटरियां बेचने वाले राकेश और बलविंदर सिंह का कहना है कि उनके पास पहले महीने में 2-4 ग्राहक बैटरी लेने आते थे परंतु ब्लैकआउट के दिनों में रोजाना 40 से 50 बैटरियां बिकने लगी और अब दुकान में माल नहीं बचा है। सुरिंदर सिंह। हाथी गेट में बैटरी की दुकान करने वाले अनिल शोरी का कहना है कि ब्लैकआउट से पहले उनके पास 70 के करीब बैटरी थी मगर अब एक भी बैटरी नहीं बची। जबकि 100 से ज्यादा ग्राहकों को वापस भेजना पड़ा। अब एक सप्ताह तक माल आने की संभावना नहीं है। वहीं जिनसे बैटरी मंगवाते थे वह फोन न उठाकर खुद महंगी बैटरियां बेच रहे हैं।

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