कोरबा| छत्तीसगढ़ी फिल्मों के प्रशंसकों के साथ दर्शकों की कमी प्रदेश में नहीं है। यही वजह है कि कुछ फिल्में विभिन्न शहरों के सिनेमा घरों में एक साथ प्रदर्शित होने के बाद लंबे समय तक परदे पर टिकी रहीं। यह दर्शकों का छालीवुड की फिल्मों व यहां के कलाकारों के प्रति लगाव ही है। यूं कहें कि छालीवुड की फिल्मों की वजह से ही सिनेमाघर जिंदा हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। छालीवुड की फिल्में बननी बंद हो जाएंगी तो प्रदेश के 25 प्रतिशत सिनेमाघर स्वयं ही बंद हो जाएंगे। यह बात मंगलवार को छत्तीसगढ़ी फिल्म मोर छइयां भुइयां-3 के निर्माता निर्देश सतीश जैन ने मीडिया से कही। उन्होंने कहा कि छालीवुड इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देने के लिए शासन की ओर से समय समय पर अनेक घोषणाएं की जाती रही हैं, लेकिन पूरी कुछ भी नहीं हो पाई हैं। राजनेता हैं उन पर कोई दबाव भी नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों को लेकर एक अलग आयोग गठन करने की घोषणा की गई थी, निर्माता निर्देशकों को सब्सिडी देने की बात कही गई लेकिन ये घोषणाएं आज भी घोषणाएं ही रह गई हैं। इससे आर्थिक रूप से सक्षम निर्माता निर्देश ही इस क्षेत्र में टिके हुए हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्मों के प्रति दर्शकों का नजरिया समय के साथ बदल रहा है। आज किसी भी उम्र के कलाकार को कोई भी रोल नहीं दे सकते। इस दौरान मन कुरैशी, दीपक साहू, दीक्षा जायसवाल, इशिका यादव आदि मौजूद थे।


