भारत-पाक सीमा पर युद्ध जैसे हालात और फैले तनाव के कारण बीते कुछ हफ्तों में कई लोगों ने अपने शादी समारोह टाल दिए थे, लेकिन अब जैसे-जैसे माहौल में थोड़ी स्थिरता आई है, लोगों ने फिर से जीवन को सामान्य बनाने की कोशिशें शुरू कर दी है। इसका सबसे सकारात्मक संकेत विवाह समारोहों की वापसी के रूप में देखा जा रहा है और खुशियों के पल लौट रहे हैं। बैंड-बाजा और बारात के साथ फिर शादियों की रौनक लौट रही है। फिलहाल अधिकतर शादियों में 100 से 150 लोगों को ही आमंत्रित किया जा रहा है, जबकि पहले ये संख्या 300 से अधिक होती थी। डेकोरेटर्स, कैटरर्स और बैंड वाले जैसे वे लोग, जिनका जीवन पूरी तरह शादी-ब्याह पर निर्भर करता है, अब दोबारा धीरे-धीरे काम पर लौटने लगे हैं। बजट अनुसार कस्टमाइजिंग मेंस डिजाइनर भजनदीप सिंह बताते हैं कि इस सीजन दूल्हे खासतौर पर दिलजीत की ड्रेस जैसा आउटफिट बनवाने में रुचि ले रहे हैं। हर दिन 1-2 क्लाइंट्स आकर ऐसी ही ड्रेस कस्टम ऑर्डर दे रहे हैं। मुगलवी और क्लासिक रॉयल लुक भी ट्रेंड में है। ग्राहक का बजट चाहे जो हो, उसी के अनुसार डिजाइन को बदला जा रहा है। खास बात यह है कि यह ड्रेस केवल दूल्हों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टाइल स्टेटमेंट बनती जा रही है। हर कोई अपने बजट के अनुसार ड्रेस तैयार करवा रहा है। वहीं दुल्हनें भी अपने लुक को अलग दिखाने के लिए नए-नए डिजाइन पसंद कर रही हैं। दिलजीत का मेट गाला लुक दिलजीत दोसांझ के मेट गाला लुक ने वेडिंग फैशन की दिशा बदल दी है। शहर के एक डिजाइनर स्टोर के मालिक राहुल बंटी के अनुसार अब तक ऐसी 6 ड्रेस के ऑर्डर मिल चुके हैं। ये ड्रेस शेरवानी, पगड़ी, दुपट्टा और कलगी समेत पूरी तरह रॉयल लुक में तैयार की जा रही है। हर डिटेल पर बारीकी से काम किया जा रहा है, ताकि लुक में कोई कमी न रह जाए। वहीं दुल्हनों के लिए सिल्क और बनारसी लहंगे, खासकर हैंडमेड वर्क वाले, तेजी से पसंद किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोग अपने शादी के दिन को यादगार बनाने और अलग दिखने के लिए लेटेस्ट डिजाइन के कपड़े खरीदने या बनवाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सादगी को प्राथमिकता रेस्टोरेंट और होटल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अमरवीर सिंह ने बताया कि शादियों की तैयारियां फिर से शुरू हो गई हैं, जिन लोगों ने शादियां टाल दी थीं, वे अब फिर से तैयार हैं। 25 बुकिंग फिर से हो गई हैं। हालांकि अभी लोग पारिवारिक माहौल और सादगी को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक ओर जहां कुछ लोग शुभ तिथियों के इंतजार में हैं, वहीं कुछ ने हालात को स्वीकार कर सादगी से विवाह कर लेना ही बेहतर समझा है। यह बदलाव समाज में धैर्य और समझदारी की मिसाल पेश कर रहा है। युवाओं और परिवारों ने मिलकर तय किया है कि विवाह जीवन की शुरुआत है और इसे रुकावट नहीं बनना चाहिए।


