भीषण गर्मी के बावजूद अमर शहीद बाबा दीप सिंह जी गुरुद्वारा साहिब में संग्रांद के अवसर पर आयोजित जप-तप समागम में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। 41 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी संगत तपती सड़कों और गलियों में बैठकर वाहेगुरु का सिमरन करती रही। यह आयोजन गहरी आस्था, अनुशासन और सेवा भावना का प्रतीक बन गया। समागम की शुरुआत बीबी चरणदीप कौर द्वारा संगती रूप में श्री जपजी साहिब, श्री चौपाई साहिब और श्री सुखमणि साहिब के पाठ से हुई। इसके उपरांत स्त्री सत्संग सभा की महिलाओं द्वारा भावपूर्ण शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिसमें सुण नाह प्यारे इक बेनंती मेरी, मेरे बाबा जी झोली भर दो, और तेरे चौपेहरे ने सानु तारिया जैसे भावविभोर कर देने वाले शबदों का गायन हुआ। सेवा कर रही कैपी ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से नियमित रूप से समागम में लंगर सेवा कर रही हैं। सुबह 10 से शाम 5 बजे तक वे पूरी श्रद्धा से सेवा करती हैं और इस दौरान हर सांस के साथ वाहेगुरु सिमरन करती हैं। उन्होंने बताया कि सेवा से उनका जीवन बदल गया वर्षों से रुकी हुई बहन की शादी अब तय हो चुकी है। गोल्डी गंभीर, जो पिछले पांच वर्षों से जोड़ा घर में सेवा कर रही हैं, ने बताया कि बाबा जी ने उनकी अरदास सुन ली और आज उनके दोनों बच्चे विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा दीप सिंह जी के दरबार में जो सच्चे दिल से अरदास करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। राजीव शर्मा ने बताया कि वे हर समागम में छबील सेवा करते हैं, और उनका पूरा परिवार संगत को पंखे की सेवा निभाता है। उन्होंने कहा कि गर्मी चाहे जितनी हो, संगत की श्रद्धा अटूट है। सेवा करते हुए खुद भी ऊर्जा मिलती है। समागम का समापन अंतिम अरदास और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के हुकमनामे से हुआ, जिसके बाद सभी संगत ने मिलकर लंगर प्रसाद ग्रहण किया। सदस्यों ने जानकारी दी कि अमृतसर स्थित शहीदी स्थान के बाद सबसे अधिक संगत अब इस पवित्र स्थल पर उमड़ रही है। अमरजीत सिंह टिक्का, सुखविंदर पाल सिंह सरना और नवप्रीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि गर्मी के बावजूद संगत का उत्साह देखते ही बनता है। हर बार संगत के बैठने और छांव के लिए पर्याप्त प्रबंध किए जाते हैं, लेकिन संगत की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक होती है। सुरिंदरपाल सिंह बिंद्रा और हरप्रीत सिंह राजधानी सहित अन्य गणमान्य सेवक भी उपस्थित रहे।


