भास्कर न्यूज|डंडई प्रखंड कार्यालय परिसर में लगा चापाकल खराब पड़ा हुआ है। हालांकि प्रखंड कार्यालय परिसर में तीन चापाकल लगे हुए हैं। लेकिन भीषण गर्मी में सभी तीनों चापाकल खराब होकर पड़ा हुआ है। उन तीन चापाकल में से किसी से भी गिलास भर भी पानी ग्रामीणों को नसीब नहीं हो पा रहा है। इधर प्रखंड कार्यालय परिसर के गेट पर चापाकल के साथ टैग कर लगाया गया जलमीनार को लगे अभी वर्ष भर का भी समय नहीं गुजारा है कि वह खराब हो गया। अधिष्ठापित के बाद उक्त जलमीनार दूसरा गर्मी भी नहीं देख पाया उससे पहले ही वह पानी देने से हाथ पांव खड़ा कर दिया।। वही भीषण गर्मी में अपने-अपने कार्यों को लेकर प्रखंड कार्यालय आ रहे ग्रामीणों को पानी के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। या तो उन्हें घर से पानी का प्रबंध कर के प्रखंड कार्यालय आना पड़ रहा है और नहीं तो खुले बाजार से पानी भरी बोतल की खरीदारी कर प्रखंड कार्यालय आना पड़ रहा है। अपने-अपने कार्यों को लेकर प्रत्येक दिन प्रखंड कार्यालय आ रहे ग्रामीणों का कहना है कि दो-तीन वर्ष पूर्व अधिष्ठापित हुए चापाकल के बारे में तो बहुत कुछ नहीं कहा जा सकता है लेकिन पेयजल की समस्या को देखते हुए उसका भी मरमत करा देना चाहिए था। उन्होंने बताया कि प्रखंड कार्यालय परिसर में लगाए गए चापाकल की हालत ऐसी है तो प्रखंड भर में अधिष्ठापित चापाकल के बारे में कुछ भी कहना बेमानी होगी। वहीं उन्होंने बताया कि प्रखंड कार्यालय परिसर के गेट के चापाकल से टैग कर जब से जालमीनार लगा है तब से हम लोगों को पानी के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त चापाकल से टैग कर जब से वहां पर जलमीनार लगा है, तब से हम लोगों को पानी मिलना है बंद हो गया है। साथ ही कहा की इससे पूर्व हम सभी जब भी प्रखंड कार्यालय आते तो सबसे पहले गेट के पास अधिष्ठापित चापाकलप पर बजापते आंख मुह धोकर पेट भर पानी पीते उसके बाद प्रखंड कार्यालय चले आते। ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि जैसा हम लोगों को जानकारी है उसके अनुसार प्रखंड क्षेत्र में लग रहे जलमीनारों को पूरे 5 वर्ष तक रखरखाव के लिए प्राकलीत राशि की 10% राशि रख ली जाती है, उसके बाद ही कार्यकारी एजेंसी को उसका भुगतान किया जाता है। बावजूद न जाने विभागीय पदाधिकारीयों के द्वारा प्रखंड कार्यालय के गेट पर लगे जलमीनार की मरमती क्यों नहीं कराई जा रही है।


