बागबाहरा, झलप, पटेवा, सिरपुर क्षेत्र से भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में जलसंकट की स्थिति विकराल होने लगी है। महासमुंद जिले के बागबाहरा, सिरपुर, झलप, पटेवा क्षेत्र के लगभग 400 से ज्यादा गांवों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसके कारण लोग न तो खेती कर पा रहे हैं और न ही उन्हें पीने का साफ पानी उपलब्ध हो पा रहा है। दैनिक भास्कर ने जिले के 20 से ज्यादा गांवों का जायजा लिया। गांवों की खेतों में बोर तो है, लेकिन लगभग सभी सूखे और बंद पड़े हैं। इनमें कई बोर तो 750 से 800 फीट तक गहरे हैं। कुछ चालू भी हैं तो उसमें से 10 मिनट में एक बाल्टी पानी निकल जाए तो बहुत है। इस तरह की स्थिति पटेवा, जामपाली, सिंघुपाली, डूमरपाली, रामपुर, माधोपुर, कुर्रूभाटा, तुरंगा जोरातराई, अमोरा, पचरी जैसे गांवों में भी है। पानी की कमी के कारण सिरपुर, बागबाहरा, झलप और पटेवा इलाके के लगभग 25 हजार एकड़ खेती प्रभावित हो रही है। वे राज्य शासन के पास कई बार क्षेत्र में पानी की व्यवस्था के लिए मांग कर चुके हैं। मोटर चालू करने के 15 मिनट बाद निकलता है एक बाल्टी पानी ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग का कोई सिस्टम हमारे पास नहीं है। बोर की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्टेट ग्राउंड वाटर बोर्ड और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड भी है। जो हर साल रिकॉर्ड दर्ज करते हैं। लेकिन इसके रिचार्ज का प्लान नहीं बनाते, जिसके कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है। जमीन से पानी निकालने का काम लगातार जारी है। प्रदेश में वाटर रिचार्ज के लिए धरातल पर काम करना चाहिए। -जीके दास, कृषि मौसम वैज्ञानिक


