अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे 25 से अधिक शोधकर्ता:मानव स्वास्थ्य के लिए खाद्य, जीवनशैली और पर्यावरण में नवाचार पर हुई चर्चा, 250 प्रतिभागी हुए शामिल

राजस्थान विश्वविद्यालय के ईसीएच इनक्यूबेशन सेंटर और इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज (ISLS) के “लेट्स स्टार्ट” केंद्र की ओर से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सोमवार से शुरुआत हुई। सम्मेलन का विषय खाद्य, जीवनशैली और पर्यावरण में नवाचार: मानव स्वास्थ्य के लिए थाद्ध। जिसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य, खाद्य, जीवनशैली और पर्यावरण के आपसी संबंधों पर चर्चा करना और नवाचारों को बढ़ावा देना था। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र राजीव गांधी की स्मृति में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि गौरव जोशी, निदेशक (HOO), एमएसएमई विकास कार्यालय, राजस्थान, ने विश्वविद्यालय द्वारा उद्यमशीलता और नवाचार के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने स्वास्थ्य और पर्यावरण में सुधार के लिए नवाचारों की आवश्यकता पर बल दिया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर अशोक कुमार, अध्यक्ष, ISLS ने की। विशिष्ट वक्ता के तौर पर प्रोफेसर मुकेश न्याति, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, यूएसए ने पर्यावरणीय कारकों और कैंसर सेल चक्र के बीच संबंधों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रोफेसर जयंत सिंह, डीन, जीवन विज्ञान संकाय, ने राजस्थान विश्वविद्यालय में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। वहीं प्रोफेसर एस.के. गुप्ता, नोडल ऑफिसर, रूसा ने इस सम्मेलन की सराहना की और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को साझा किया। सम्मेलन के तकनीकी सत्र में प्रमुख वक्ता के तौर पर प्रो. अलेस रामास्वामी स्मृति व्याख्यान प्रोफेसर अशोक कुमार, पूर्व कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय, ने दिया। प्रोफेसर एम.के. पंडित ने जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव पर चर्चा की, जबकि डॉ. अमित शर्मा (जर्मनी) ने कैंसर रोगियों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण पर अपने शोध प्रस्तुत किए। सम्मेलन में 75 से अधिक शोधकर्ताओं ने मौखिक प्रस्तुतियां दीं और 250 से अधिक प्रतिभागियों ने मानव स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। आयोजन सचिव डॉ. सुनील छिम्पा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और अगले दिन के कार्यक्रम की जानकारी दी। यह सम्मेलन खाद्य, जीवनशैली और पर्यावरण के बीच के संबंधों को समझने और उनके माध्यम से मानव स्वास्थ्य में सुधार की रणनीतियों को लागू करने पर जोर दे रहा है। यह नवाचारों को बढ़ावा देने के साथ-साथ शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग को भी सुदृढ़ करने का एक मंच साबित हुआ।

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