उधार पर पोषाहार, राज्य में 5 साल से कम के 39% बच्चे कुपोषित

झारखंड के 38,523 आंगनबाड़ी केंद्रों में उधार पर पोषाहार चल रहा है। कहीं जनवरी से तो कहीं फरवरी से इसके पैसे नहीं मिल रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र की सेविकाएं और सहायिकाएं दुकानों से उधार लेकर 14.99 लाख बच्चों का पेट भर रही हैं। ये बच्चे तीन से छह साल तक के हैं। सेविकाओं का कहना है कि अब तो उधार मिलना भी बंद होने लगा है। दुकानदार बकाया भुगतान न करने पर भोजन सामग्री देने से मना करने लगे हैं। ऐसे में कई जगह सेविकाओं को खुद के खर्च पर भोजन सामग्री खरीदनी पड़ रही है। पैसे न मिलने से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को भोजन कैसे मिल रहा है, यह पड़ताल करने के लिए भास्कर की टीम 13 जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंची। वहां बच्चों की थाली में तय मेन्यू के अनुसार ही भोजन था। शनिवार सुबह बच्चों को हलुआ दिया गया था तो दोपहर के खाने में कहीं खिचड़ी और अंडे तो कहीं दाल-भात और सब्जी। सेविकाओं ने बताया कि अगर जल्दी ही भुगतान नहीं हुआ तो यह व्यवस्था बरकरार रखना मुश्किल होगा। एक बच्चे के लिए नियमित आहार मात्रा अनौपचारिक शिक्षा के साथ मिलता है भोजन, स्वास्थ्य की देखभाल की जानकारी भीआंगनबाड़ी केंद्रों में गरीबों के बच्चे ज्यादा होते हैं। यह माता-पिता अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजकर काम करने चले जाते हैं। इन केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के साथ-साथ अनौपचारिक शिक्षा भी दी जाती है। बच्चों के लिए यहां पर खेल का सामान भी होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के अनुसार, राज्य में 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 39 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 32.1 प्रतिशत बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से कम वजन के हैं, 19.3 प्रतिशत बच्चों का वजन उनके कद के अनुपात में कम है, और 35.5 प्रतिशत बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार कम है। विभाग से मिलता है सिर्फ चावल, और सब उधारी पर पोषाहार के नाम पर विभाग से सिर्फ चावल मिलता है। अन्य सामग्री जैसे दाल, सब्जी, मसाला, चीनी, सूजी और तेल आदि बाजार से खरीदनी पड़ती है। इसका वाउचर जमा करने के बाद विभाग भुगतान करता है। लेकिन पांच माह से भुगतान न होने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि झारखंड में कुपोषण बड़ी समस्या है। अगर ऐसे हालात रहे तो कुपोषण से निपटना मुश्किल हो जाएगा। केंद्र से राशि न मिलने से हुई ऐसी स्थिति : पासी समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने कहा कि कुछ जिलों में जनवरी से तो कुछ जिलों में फरवरी से राशि नहीं भेजी गई है। केंद्र से राशि नहीं मिलने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। आंगनबाड़ी की इस योजना में केंद्र का हिस्सा 60 प्रतिशत और राज्य का हिस्सा 40 प्रतिशत है। केंद्र से राशि की मांग की गई है। शीघ्र ही वह राशि मिलने की उम्मीद है। क्या है मेन्यू इसमें चावल राज्य सरकार की ओर से प्रखंड कार्यालय से मिलता है। अन्य सामान खरीदना पड़ता है।किस जिले में कितने आंगनबाड़ी केंद्र और बच्चे जिला केंद्र बच्चे बोकारो 2256 70,637 चतरा 1138 49,461 देवघर 1567 68,959 धनबाद 2231 76,066 दुमका 2075 80,929 पू. सिंहभूम 1734 54,933 गढ़वा 1330 61,559 गिरिडीह 2431 1,48,420 गोड्‌डा 1791 83,553 गुमला 1670 50,982 हजारीबाग 1770 58,655 जामताड़ा 1193 38,550 खूंटी 840 22,401 कोडरमा 751 33,031 जिला केंद्र बच्चे लातेहार 964 43,446 लोहरदगा 753 26,058 पाकुड़ 1167 66,211 पलामू 2625 1,05,132 रामगढ़ 1042 30,174 रांची 2837 85,938 साहेबगंज 1688 94,191 सरायकेला 1373 44,173 सिमडेगा 967 26,502 प. सिंहभूम 2330 79,111 कुल 38523 14,99,042 स्रोत: समाज कल्याण विभाग (हर महीने संख्या में थोड़ा-बहुत बदलाव होता है। यह आंकड़ा दिसंबर 2024 से लेकर फरवरी 2025 तक का है)

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