भास्कर न्यूज | जालंधर इंटरनेट के जमाने में इंसान इंफॉर्मेशन ओवरलोड का शिकार है। इस बीच फेक न्यूज की चुनौती भी खड़ी हो गई। सही सूचना को लेकर जद्दोजहद बढ़ गई है। ऐसे में संग्रहालयों का महत्व और बढ़ गया है। यहां पर ज्ञान और तथ्य सहजता के साथ मौजूद हैं। यूनेस्को 18 मई को हर साल संग्रहालय दिवस मनाता है ताकि लोगों को इनके महत्व के बारे में जागृति आए। ये सिलसिला 1977 से जारी है। देश के आजादी संग्राम की सही जानकारी प्राप्त करनी है तो संविधान चौक में स्थित देश भगत यादगार हाल में आएं। यहां पर उन महान देश भगतों को समर्पित फोटो संग्रहालय है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया। लोगों को आजादी के लिए लड़ने की प्रेरणा दी। यहां ऐतिहासिक पुस्तकालय भी है। इन दिनों यहां रौनक लगी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे और इतिहास के विषय में रिसर्च कर रहे स्टूडेंट्स पूरा-पूरा दिन यहां ऐतिहासिक तस्वीरों और किताबों से रू-ब-रू हो रहे हैं। देश भगत यादगार हाल कमेटी इसकी देखरेख कर रही है। ये संग्रहालय रिसर्च प्रोजेक्टों से जुड़े युवाओं के लिए बड़ा मंच बना है। शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी सुरिंदर कुमार कोछड़ यहां ऐतिहासिक तस्वीरों को देख रही थीं। उन्होंने कहा- हमें अपने बच्चों को संग्राहलयों व पुस्तकालयों से जोड़ना होगा। प्राचीन तस्वीरों को देख रहे लोग। रिसर्च से जुड़े छात्र पहुंच रहे यहां रोजाना जालंधर के अलावा आसपास के शहरों से स्टूडेंट्स आते हैं। वे बताते हैं कि इंटरनेट पर सर्चिंग का ट्रेंड बढ़ा है। आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ने ये काम तेज कर दिया। लेकिन सही तथ्य जुटाने हैं तो संग्रहालय व पुस्तकालय ही सही माध्यम हैं। देश भगत यादगार हाल कमेटी के रिसर्च चिरंजीलाल कंगणीवाल ने कई किताबें लिखी हैं। उन्होंने ऐेतिहासिक दस्तावेजों से अहम जानकारियों को किताबों के रूप में सबके सामने रखा है। वे बताते हैं कि पंजाब के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स यहां आते हैं। इसका मकसद भी यही था कि शहादत से भरी परंपराओं से नई पीढ़ियों को जोड़ा जा सके।


