स्कूल शिक्षा विभाग का युक्तियुक्तकरण गलत है। इसे लेकर सरकार को ब्लू प्रिंट सौंपा गया है। इसमें बताया गया है कि युक्तियुक्तकरण की 28 अप्रैल 2025 की नई नीति पूरी तरह से 2 अगस्त 2024 की नकल है जो खारिज की जा चुकी है। इसमें विद्यार्थी हित को पुनः अनदेखा किया गया है। यह नई शिक्षा नीति के खिलाफ है। इससे सरकारी स्कूल बंद होने की आशंका है। यह नीति विद्यार्थियों के हित में नहीं है। शालाओं के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षकों की संख्या घटाई जा रही है। प्राथमिक शाला में 5 कक्षाएं लगती हैं। ऐसे में 1 प्राधानपाठक के साथ 1 शिक्षक कैसे पढ़ा पाएंगे। माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी में भी शिक्षकों की संख्या घटाई जा रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने युक्तियुक्तकरण नीति की त्रुटियों की मुख्यमंत्री, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग एवं संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को ब्लूप्रिंट के साथ जानकारी दी। फेडरेशन के अध्यक्ष राजेश चटर्जी ने शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण को लेकर सुझाव दिया कि यह कक्षाओं की संख्या एवं विषय के आधार पर हो। प्राथमिक शिक्षा से विद्यार्थियों को कक्षावार विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा स्तर के परीक्षा मूल्यांकन में गिरावट आ रही है। सरकारी विद्यालयों के ज्यादातर विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। वे शाला के विद्यालय शिक्षण पर निर्भर रहते हैं। यदि दर्ज संख्या के आधार पर शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जाता है, तो विद्यार्थियों को कक्षावार विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं होगा। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के विरुद्ध है। अतः एनईपी के अनुसार ही युक्तियुक्तकरण की नीति-निर्देश बनाए जाने चाहिए। सेटअप में परिवर्तन दोषपूर्ण है। इससे शिक्षा व्यवस्था में प्रगति न होकर अध्ययन-अध्यापन का पतन होगा।


