सरकारी हेल्थ सेंटरों में 8 माह से बंद पड़ी खून जांचने की मशीन सुधारने के सारे सरकारी प्रयास फेल हो गए हैं। कई स्तर पर प्रयास करने के बाद अब निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मशीन का लॉक खोलकर उसे चालू करने वाली कंपनी को ही मशीनों के संचालन और रीएजेंट सप्लाई का ठेका दिया जाएगा। सीजीएमएससी इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी करेगी। मशीनें बंद होने के बाद शासकीय अस्पतालों के तकनीशियनों के माध्यम से बार कोड का लॉक तोड़ने की कोशिश की गई। ये प्रयास किया गया कि किसी भी तरह से मशीनें चालू हो जाएं। सभी स्तर पर नाकामी मिलने पर अफसरों ने मशीनों का लॉक खोलने और इसके मेंटेनेंस का ठेका प्रायवेट कंपनी को सौंपने का निर्णय लिया है। अफसरों के अनुसार टेंडर में ही स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सीबीसी मशीन के बारकोड का लॉक तोड़ना होगा। साथ ही मशीन का साफ्टवेयर अपडेट करना पड़ेगा। टेंडर लेने के पहले मशीन का बारकोड खोलकर उसे चालू करना होगा। क्या है मशीनों के बंद होने की कहानी भास्कर ने 19 फरवरी को खुलासा कर दिया था कि मोक्षित कंपनी के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा ने रीएजेंट घोटाले का पैसा पाने के लिए प्रायमरी हेल्थ सेंटरों की खून जांचने वाली मशीन बंद करवा दी। इसके लिए उसने बाकायदा अपने इंजीनियरों की टीम फील्ड में उतारी थी। चूंकि मशीनों की सप्लाई शशांक की मोक्षित कंपनी ने की थी, इसलिए उसके इंजीनियर मेंटकिस पिछले साल सितंबर से मशीनें बंद होने का सिलसिला शुरू हुआ और दो महीने के भीतर पूरी मशीन लॉक होकर बंद हो गई। मशीनें बंद होने के बाद शशांक ने स्वास्थ्य विभाग को ब्लैकमेल करने का प्रयास शुरू कर दिया। सिटी एंकर


