निर्माण को वैध कराने पिछले एक साल में 334 लोगों ने निगम से राजीनामा किया है। निगम ने ऐसे लोगों पर 15 से 20 गुना तक जुर्माना लगाया है। निगम के नगर निवेश विभाग ने इन सभी पर 4.77 करोड़ रुपए जुर्माना किया था। लेकिन अभी तक आधी रकम यानी 2.34 करोड़ ही वसूल हुए हैं। जुर्माना शुल्क अदा नहीं करने वालों पर अब तक निगम ने कोई सख्ती नहीं की थी। लेकिन अब सभी बकायादारों को चिट्ठी लिखकर कहा जा रहा है कि वे अपना जुर्माना शुल्क जमा करें। जुर्माना अदा नहीं करने पर उनके पक्के निर्माण तोड़ दिए जाएंगे। इस मामले में अब किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। 30 अप्रैल तक संपत्ति कर वसूल करने के बाद निगम के राजस्व अमले को भी इस बकाया रकम की वसूली के काम में लगा दिया गया है। सभी से कहा गया है कि हर हाल में मई के आखिर तक जुमनि की बाकी रकम निगम के पास जमा हो जानी चाहिए। पिछले एक साल में निगम से राजीनामा करने वालों में आधे से ज्यादा निर्माण आउटर में हुए हैं। यही वजह है कि राजीनामे के लिए सबसे ज्यादा आवेदन जोन 8 और 10 45-45 जमा हुए थे। बाकी जोन की तुलना में में जोन 2 में सबसे ज्यादा 39 आवेदन प्राप्त हुए हैं। निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि सभी आवेदनों का परीक्षण करने के बाद जुर्मान की राशि तय कर दी गई थी। लोगों को एक महीने का समय दिया गया था। उसके बाद भी अधिकतर लोग ऐसे हैं जिन्होंने 4 से 6 महीना बीत जाने के बाद भी जुमनि की रकम जमा नहीं की है। यही वजह है कि अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। नियमितीकरण वाले एक साल से भटक रहे पिछली कांग्रेस सरकार में नियमितीकरण कराने वाले करीब 1300 लोग अभी भी भटक रहे हैं। सरकार बदलने के बाद से ही इनके आवेदनों पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। निगम ने ऐसे आवेदनों का परीक्षण कर शुल्क भी तय कर दिया था। लेकिन नियमितीकरण समिति की अंतिम मुहर नहीं लगने की वजह से अभी तक ये निर्माण वैध नहीं हो पाए हैं। ऐसे सभी लोगों के आवेदन समिति के पास जमा हैं। संपत्ति कर वसूलने में पिछड़े निगम अमला पिछले साल 300 करोड़ के आसपास ही संपत्ति कर वसूल पाया है। निगम का दावा था कि नए और बकायादारों को मिलाने के बाद राजस्व 500 करोड़ के पास पहुंच जाता। संपत्ति कर वसूली के लिए निगम के राजस्व अमले को एक माह यानी 31 मार्च के बाद 30 अप्रैल तक का अतिरिक्त समय दिया गया था। इसका बावजूद वसूली नहीं हो सकी। अब बड़े बकायादारों से वसूली की जा रही है।


