भास्कर न्यूज | गिरिडीह जमुआ प्रखंड के मदनूटांड़ (दुम्मा) में आयोजित आठ दिवसीय श्रीश्री 108 ग्राम देवी प्राण प्रतिष्ठा के तीसरे दिन की कथा के दौरान आचार्य मदन मोहन पांडेय ने भगवती के नौ रूपों की संगीतमय कथा प्रस्तुत की। संगीतमय कथा के दौरान उन्होंने “मैं बालक तू माता शेरा वालिए… चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है… धोवत धोवत तोहरो चरणियां… जैसे भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब झूमाया। कथा प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ उनकी कथा को पढ़ने या सुनने से व्यक्ति को उसके कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। देवी दुर्गा हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। दुर्गा शक्ति, सुरक्षा, मातृत्व, युद्ध और विनाश से जुड़ी हैं। देवी दुर्गा के नौ रूप पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंध माता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री हैं और हिंदू धर्म में प्रत्येक का बहुत सम्मान किया जाता है। हिंदू धर्म के कुछ संप्रदायों, जैसे शक्ति और शिव के अनुयायियों के बीच दुर्गा को एक ही देवता माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी दुर्गा के नौ रूपों को राक्षस राजा महिषासुर के साथ नौ दिनों के युद्ध के दौरान दुर्गा के नौ चरण माना जाता है। अंतिम और दसवां दिन वह था जब देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और इसे हिंदू धर्म में विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। ये नौ रुप अलग-अलग सिद्धियां देते हैं। इसमें माता के महागौरी लेकर से कालरात्रि जैसे नौ रुप हैं। कथावाचक आचार्य मदन मोहन पांडेय का माल्यार्पण डॉ अनिल कुमार, टेकलाल महतो, प्रकाश कुमार, जयनारायण महतो ने किया। कथा समाप्ति पर सामूहिक रूप से मां भगवती की सामूहिक आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।


