बिलासपुर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। जुलाई 2024 से अब तक 10 हजार वाहन चालकों से 80 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया है। प्रति माह औसतन 1000 लोगों को नियम तोड़ने पर दंडित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर यातायात पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे के नेतृत्व में टीम शहर और हाइवे पर लगातार निगरानी कर रही है। पुलिस के पास विशेष इंटरसेप्टर वाहन है। यह वाहन स्पीडोमीटर, स्पीड राडार गन और ब्रीथ एनालाइजर से लैस है। इंटरसेप्टर वाहन कांच की पारदर्शिता और ध्वनि स्तर भी मापता है। नियम तोड़ने वालों को सीधे मोबाइल पर चालान भेजा जाता है। एक्सीलेटर पर नियंत्रण की नसीहत ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को नसीहत दी है कि एक्सीलेटर पर नियंत्रण रखे अन्यथा उन्हें न केवल भारी चालान वहन करना पड़ेगा, बल्कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकता है। ट्रैफिक पुलिस के पास एक ऐसा इंटरसेप्टर वाहन है, जिसमें लगे कैमरे और मशीनों से सड़कों पर चलने वाले प्रत्येक वाहनों की गति मापी जाती है। इंटरसेप्टर की पैनी नजर दरअसल, इंटरसेप्टर एक साथ कई काम करता है। इसमें लगा स्पीडोमीटर, स्पीड रडार गन, ब्रीथ एनालाइजर, प्रकाश की तीव्रता, कांच की पारदर्शिता, ध्वनि विस्तारक मापक यंत्र (साउंड लेबल) और अन्य की जांच कर कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करता है। यानी यदि इनमें से किसी जांच में वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पाया जाता है तो उसके मोबाइल पर सीधे चालान भेजा जा सकता है। काली फिल्म लगाने पर 2000 जुर्मानाएडिशनल एसपी ट्रैफिक करियारे ने दैनिक भास्कर को बताया कि ब्लैक फिल्म लगाने वाले वाहन चालकों और वाहन मालिकों के विरुद्ध एमव्हीएक्ट की धारा 100/177 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में वाहन चालक के विरूद्ध 2000 रुपए का समन शुल्क काटा जाता है और तत्काल ही वाहन पर लगे हुए ब्लैक फिल्म को निकलवा दिया जाता है। ऑनलाइन चालान इंटरसेप्टर पर इनबिल्ट स्पीडोमीटर अर्थात स्पीड रडार गन कैमरे के माध्यम से वाहनों की नियत गति से अधिक गति पर तत्काल मॉनिटर करते हुए ऑनलाइन चालानी कार्रवाई की जाती है। धारा 112/183(1) के तहत 1000 रुपए का जुर्माना किया जाता है। इसी प्रकार स्पीडोमीटर में इनबिल्ट ब्रीथ एनालाइजर के द्वारा भी शराब और नशे की हालत में वाहन चलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है। साथ में ऐसे वाहन चालक के विरुद्ध एमव्हीएक्ट की धारा 185 के तहत चालानी कार्रवाई करते हुए प्रकरण कोर्ट भेजा जाता है। इसमें 10 हजार से लेकर 20 हजार तक का समन शुल्क भरने के साथ न्यायालयीन प्रक्रियाओं से भी उन्हें गुजरना पड़ता है। तेज लाइट पर भी कार्रवाई
इंटरसेप्टर पेट्रोलिंग टीम के द्वारा वाहनों में लगे हुए विभिन्न प्रकार के लाइटों की तीव्रता का भी मापन किया जाता है। विधिमान्य तीव्रता वाले प्रकाश से अधिक तीव्रता वाले मॉडिफाइड लाइट लगाने एम व्ही एक्ट की धारा 108 के तहत 2000 का चालान काटा जाता है। वहीं प्रेशर हॉर्न और मोडिफाइड साइलेंसर लगाने पर वाहन चालकों के विरुद्ध लगातार एमव्हीएक्ट की धारा 119(2)/177 के तहत 300 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। वाहन में इन्हें दोबारा लगाने पर प्रकरण कोर्ट भेजा जाता है, जहां पर कई बार 5000 से 10000 और उससे अधिक राशि का भी जुर्माना लगाया जाता है।


