नरेश शर्मा|सिमडेगा जिले में गर्मी चरम पर है,तेज धूप गर्म हवा से जहां लोग परेशान हो रहे है। वहीं स्थानीय लीची फल के मिठास से लोग अपना गला तर कर रहे ओर लीची फल का स्वाद ले रहे हैं। यहां की गुदेदार और रसीली लीची जिसे रसगुल्ला लीची भी कहा जाता है न केवल सूखे गले को राहत देती है,बल्कि इसका स्वाद और पोषण भी लोगों को खूब लुभाता है। यही कारण है कि सिमडेगा की लीची की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। फिलहाल सिमडेगा की लीची झारखंड के अलावा ओडिशा के राउरकेला,संबलपुर, सुंदरगढ़, छत्तीसगढ़ के रायपुर रायगढ़,खरसिया,पत्थलग ांव में भेजी जा रही है। छत्तीसगढ़ के लोग भी सिमडेगा की लीची के स्वाद के कायल हो गए हैं। वहां के व्यापारी थोक में लीची की खरीदारी कर रहे हैं। जिले के कई क्षेत्रों जैसे सिमडेगा, कोचेडेगा, मुडिया,रेंग ारिह, जलडेगा,बोलबा,कोलेबिर ा और लचरागढ़ में लीची की फसल बड़े पैमाने पर होती है। लीची का पेड़ आमतौर पर तीसरे साल से फल देना शुरू कर देता है। एक पेड़ से लगभग दो से ढाई हजार तक लीचियां प्राप्त होती हैं। व्यापारी अक्सर पूरे पेड़ की फसल को एकमुश्त खरीद लेते हैं,जिससे किसानों को एक साथ अच्छी आय हो जाती है। जिले के किसान व्यापार की दृष्टिकोण से भी लीची फल का व्यापार कर रहे हैं जिससे उनके लिए यह आय का एक बेहतरीन स्रोत बन गया है ।


