राजधानी पुलिस हर माह किराए के वाहनों में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही रही है। इसके अलावा राज्य में वीआईपी मूवमेंट होने पर एक ही दिन में किराये की गाड़ियों पर 2 करोड़ एक्स्ट्रा खर्च किए जाते हैं। इस तरह हर साल 14 करोड़ रुपए केवल किराए पर खर्च हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात है कि अगले एक-दो माह में गाड़ियों के किराये पर खर्च दोगुना होने वाला है। क्योंकि शासन ने किराए की दर बढ़ा दी है। अभी स्कॉर्पियो का रोज का किराया 2000 रुपए है। इसके अलावा 12-14 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से गाड़ी चलने का चार्ज अलग दिया जाता है। अब इसी गाड़ी का 4000 रुपए प्रतिदिन किराये के अलावा 17-18 रुपए प्रति किमी गाड़ी चलने का चार्ज दिया जाएगा। इससे शासन पर दोगुना भार पड़ेगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सबसे ज्यादा गाड़ियों की जरूरत रायपुर पुलिस को पड़ती है। यहां रोजाना 150 किराए की गाड़ियां चल रही हैं। ये गाड़ियां जिले में पदस्थ पुलिस अधिकारियों और थानों के अलावा मंत्री, नेता व निगम-मंडल के पदाधिकारियों के काफिले में चल रही हैं। इसलिए रायपुर में गाड़ियों को किराए लेने के हर बार टेंडर नहीं किया जाता है। जरूरत के अनुसार गाड़ियों का किराए पर ले लिया जाता है। भुगतान पुलिस विभाग करता है। पीएम के प्रवास में 300 गाड़ियों की जरूरत
राज्य में जब भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, रक्षामंत्री का प्रवास होता है या रायपुर में बड़ी सभा अथवा कार्यक्रम आयोजित होते हैं तब 300 से ज्यादा एक्स्ट्रा गाड़ियों की जरूरत पड़ती है। क्योंकि ड्यूटी में आने वाले अधिकारियों से लेकर नेताओं के फालो-पायलेट में किराए की गाड़ियां लगाई जाती है। पुलिस विभाग या शासन के पास पर्याप्त गाड़ियां नहीं है। इसलिए अलग-अलग एजेंसियों से गाड़ियां किराए पर ली जाती है। विधानसभा, लोकसभा और नगरीय निकाय चुनाव के दौरान पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में गाड़ियां बुलाई गई थी। 32 दिनों के चुनाव के दौरान 20-20 करोड़ से ज्यादा का बिल लगाया गया है। किलोमीटर में खेल, कई बार शिकायतें
अधिकांश ट्रेवल एजेंसी किलोमीटर बढ़ाकर ही गाड़ियों का बिल जमा कर रहे हैं। दस्तावेजों में इसे इतनी सावधानी से किमी बढ़ाया जाता है कि गड़बड़ी सामने नहीं आती। पुलिस विभाग को बिल पास करना पड़ता है। यही वजह है कि कई आईपीएस, रापुसे के अधिकारियों से लेकर टीआई, एसआई, आरआई, सूबेदार व सिपाहियों की गाड़ियां पुलिस लाइन में अटैच कर चलाई जा रही हैं। हालांकि ये गाड़ियां इनके खुद के नाम पर नहीं होती है। ट्रेवल एजेंसी के नाम पर गाड़ियां चलायी जा रही है। इस वजह से उनके नाम सामने नहीं आते। हालांकि कई बार किमी बढ़ाने की शिकायतें हो चुकी हैं। इतने में हर साल खरीद सकते हैं 71 स्कॉर्पियो
अकेले रायपुर में ही गाड़ियों का 14 करोड़ से ज्यादा किराया हर साल दिया जा रहा है। इतने बजट में हर साल 66 स्कॉर्पियों खरीदी जा सकती है। या फिर 82 टाटा सफारी, 127 तेवरा और बोलेरो खरीद सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का तर्क है कि गाड़ियां तो खरीदी जा सकती हैं, लेकिन उसे चलाने के लिए विभाग में ड्राइवर नहीं है। पुलिस विभाग में रोज दो ड्राइवर की जरुरत होती है, जो शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं।
हर जिले में चल रही किराए की गाड़ियां : छत्तीसगढ़ के हर जिले में किराए की गाड़ियां चल रही है। दुर्ग में 12, जगदलपुर में 20, बिलासपुर में 15 से ज्यादा गाड़ियां किराए पर चल रही है। वीआईपी मूवमेंट होने पर इन जिलों में भी बड़ी संख्या में गाड़ियों को किराए पर लिया जाता है। इनोवा, स्कॉर्पियो का किराया होगा महंगा – अब स्कॉर्पियों, बोलेरो, बलेनो, तवेरा समेत अन्य गाड़ियां अब 4000 रुपए प्रति माह या 100 किमी से ज्यादा चलने पर 17 रुपए प्रति किराया लिया जाएगा।


