महासमुंद जिले के झलप के किसान और पूर्व सरपंच तुलाराम चंद्राकर समेत आसपास के गांव के लोग पिछले 45 साल से क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर शासन से लड़ाई लड़ रहे हैं। जलसंकट से उबरने के लिए लड़ाई करने वाले तुलाराम 72 साल के हैं और अभी भी वे हर महीने अलग-अलग गांवों में जाकर बैठक करते हैं। राज्य शासन के पास अपनी आवाज बुलंद करने का आग्रह करते हैं। तुलाराम ने बताया कि लगातार प्रयासों के बाद पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सर्वसमाज समन्वय महासभा के माध्यम से उन्होंने भाजपा संगठन के नेताओं से मुलाकात की और क्षेत्र का सूखा दूर करने के लिए पानी की मांग की। उन्होंने बताया कि गांवों में होने वाली बैठक के दौरान हर किसान 100 रुपए की मदद करता है। इन पैसों का उपयोग तुलाराम और उनके सहयोगी रायपुर आने और नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे क्षेत्र के लिए पानी की मांग करते हैं। यह सिलसिला कई वर्षों से चला आ रहा है। लगातार बैठकों और मुलाकात के बाद भाजपा के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय जम्वाल और चुनावी घोषणा पत्र के प्रभारी विजय बघेल ने सिकासेर से कोडार तक नहर लिंकिंग परियोजना के नाम से इसे मोदी की गारंटी के रूप में शामिल किया। सिकासेर को कोडार तक नहर बनाकर जोड़ने की तैयारी: तुलाराम चंद्राकर और सर्वसमाज समन्वय महासभा के प्रांताध्यक्ष डॉ. संजीव वशिष्ठ ने बताया कि शुरू में जम्वाल और अन्य नेता इतनी बड़ी परियोजना को घोषणापत्र में शामिल करने को तैयार नहीं थे। लेकिन जब उन्हें बताया गया कि यह नदी जोड़ो अभियान केंद्र सरकार के अधीन आता है और इसे मोदी की गारंटी के नाम से शामिल किया जा सकता है। तब जाकर इसे घोषणापत्र में शामिल किया गया। पानी की समस्या पर विचार करेंगे घोषणा-पत्र में किए गए वादों पर समयबद्ध तरीके से अमल होता है। निश्चित रूप से सरकार लोगों की पानी की इस समस्या पर विचार करेगी। मैं इसे मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के संज्ञान में लाऊंगा। -विजय बघेल, दुर्ग सांसद (तत्कालीन भाजपा घोषणा पत्र कमेटी के प्रभारी) सर्वे का काम पूरा, स्वीकृति जल्द
बताया गया है कि सिकासेर-कोडार डैम नदी जोड़ो परियोजना का सर्वे पूरा हो चुका है। लगभग पांच करोड़ रुपए में हुए सर्वे के बाद इसकी डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। लगभग 2600 करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत सिकासेर जलाशय से बागबाहरा के बोकरामुड़ा तक लगभग 130 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा, जिससे पानी कोडार जलाशय तक पहुंचेगा। यह परियोजना किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रबी सीजन में भी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।


