प्रदेश में सरकारी सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है। मंत्रालय व विभागों की कार्यप्रणाली ऑनलाइन की जा रही है। साथ ही करीब 6 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं को भी अपडेट किया जा रहा है। अब सार्वजनिक अवकाश की अवधि में मृत्यु होने पर भी सरकारी कर्मचारी के आश्रित परिवार को अनुग्रह राशि यानी अनुदान दिया जाएगा। यह 50 हजार रुपए तक होगा। यही नहीं, आत्महत्या की स्थिति में भी यह नियम लागू होगा। एक से अधिक विधवा होने पर दोनों में अनुग्रह अनुदान बराबर बांटा जाएगा। वित्त विभाग ने निर्देशों को एकजाई किया है। पुराने ज्ञापनों व निर्देशों की समीक्षा के बाद नए निर्देश लागू किए गए हैं। सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है। दशकों से यह व्यवस्था चली अा रही है। अगर किसी सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी से लौटते वक्त हादसे या रास्ते में मृत्यु हो जाए तो अनुग्रह राशि मिलेगी। मृतक के किस आश्रित को अनुग्रह राशि मिलेगी, यह क्रम भी तय किया गया है। यदि पति-पत्नी दोनों ही सरकारी सेवा में है, तो किसी एक की मृत्यु पर ही दूसरे को अनुग्रह राशि की पात्रता होगी। वित्त सचिव मुकेश बंसल ने कार्यालय प्रमुख द्वारा मृत्यु की सूचना जिलाध्यक्ष, संभागीय संयुक्त संचालक कोष, लेखा एवं पेंशन महालेखाकार, विभागाध्यक्ष और विभाग को भेजने कहा है। अनुदान कब-कब क्या होगी भुगतान की प्रक्रिया व मापदंड कर्मचारी की सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर उनके आश्रितों को छत्तीसगढ वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के आधार पर बैंड वेतन में वेतन और ग्रेड-पे के योग के छह गुना के बराबर मिलता है। {मृत्यु के 15 दिन के अंदर अनुदान का भुगतान होगा। {सेवक यदि राजपत्रित है तो उसके कार्यालय प्रमुख द्वारा दिया जाएगा। {सेवक यदि अराजपत्रित है तो आहरण-संवितरण अधिकारी प्रदान करेगा। {यदि सेवक स्वयं कार्यालय प्रमुख है, तो नियंत्रण अधिकारी मंजूरी देंगे। कार्यालय प्रमुख भुगतान करेंगे। {सचिवालय के सभी श्रेणियों के प्रकरणों में जीएडी मंजूरी देगा। भुगतान मुख्य लेखाधिकारी करेंगे। {प्रतिनियुक्ति या प्रशिक्षण पर भेजे गए केस में कार्यालय प्रमुख भुगतान करेंगे। {अनुदान उसी लेखा शीर्ष को विकलित होगा जिससे मृतक के वेतन-भत्ते आहरित होते थे। किस आश्रित को मिलेगा


