पिछले साल पहाड़ से पानी आया था, 13 जगह बना रहे बंड, 3 करोड़ रुपए से निकासी बना रहे

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा किरंदुल में सोमवार को 40 मिनट की बारिश से फिर से 2024 में एनएमडीसी के खदानों से आए जलजले को याद कर लोग डर गए। सोमवार को किरंदुल क्षेत्र में जमकर बारिश हुई जिसके बाद पहाड़ों से पानी उतरकर शहर के कई मोहल्ले में घुसा हालांकि इससे किसी का नुकसान नहीं हुआ पर लोग एक बार फिर से पिछली बारिश की घटना को याद कर सहम गए। पिछले साल किरंदुल में 2 बार आपदा आई थी जिसमें 200 से अधिक घर पानी और एनएमडीसी के मलबे से बर्बाद हो गए थे। पर एनएमडीसी और जिला प्रशासन पहाड़ों से आने वाले पानी को रोकने की व्यवस्था में लगे हैं, डिपाजिट 11 बी जहां से बाढ़ का पानी और मलबा शहर में आया था वहां 13 जगह चिह्नांकित कर बंड बनाएं जा रहे हैं। साथ ही बारिश के पानी को स्टोरेज करने की व्यवस्था भी की जा रही है। पहाडों का पानी नीचे न आए इसके लिए जिला प्रशासन और एनएमडीसी के बीच कई दौर की बैठक भी हो चुकी है। कलेक्टर द्वारा व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। 15 दिनों में काम पूर्ण करने के निर्देश : कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया एनएमडीसी के अधिकारियों के साथ अभी हाल ही में बैठक कर बारिश का पानी नीचे न आए इसकी पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने बताया 15 दिनों में काम पूरा हो जाएगा, किरंदुल शहर के लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है बारिश में पहाड़ों से पानी अब शहर में नहीं आएगा। पीडब्ल्यूडी कर रहा पानी निकासी की व्यवस्था पहाड़ों से आने वाले जलजले को रोकने और इसके निकासी की पूरी व्यवस्था इस बार पहले से की जा रही है। खनन क्षेत्र में बंड बनाए जा रहे हैं तो नीचे ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने 3 करोड़ की राशि खर्च की जा रही है, ऊपर से आने वाला पानी अब ड्रेनेज के माध्यम से सीधे किरंदुल शहर के बाहर निकलेगा, नालियों में अतिक्रमण न हो इसकी जिम्मेदारी नगरपालिका को दी गई है। पिछले वर्ष बारिश एनएमडीसी के लौह अयस्क मटेरियल लोगों के घरों में घुस गया था इससे हड़कंप मच गया था। सोमवार को करीब 40 मिनट की बारिश ने वही घटना को ताजा कर दिया और फिर जिला प्रशासन, नगरीय प्रशासन की पोल खोल दी कि प्रशासन व एनएमडीसी कितने सतर्क हैं। अभी इस तरह की मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी और प्रशासन एक बार फिर मूक दर्शक साबित हुआ मूसलाधार बारिश में लोग कहां जाएं। पिछले साल 21 व 27 जून को आफत की बारिश हुई थी और लोगों को अपने घरों को छोड़कर मंगल भवन में शरण लेना पड़ा था। सोमवार को हुई बारिश से मुख्य मटन, चिकन, मछली मार्केट की स्थिति बदहाल कर दिया। इसका कारण पुलिया खोदने से पहले कोई बैकअप प्लान तैयार नहीं किया गया जबकि सर्व विदित है कि किरंदुल में बारिश का कोई भरोसा नहीं होता है।

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