मनमानी . कोरिया और एमसीबी जिले में 4000 में से 3200 ट्रैक्टर खेती के लिए पंजीकृत

भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर कोरिया और एमसीबी जिले में कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर अब शासन के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। दोनों जिले में कुल 4000 ट्रैक्टर रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से लगभग 3200 ट्रैक्टर कृषि उपयोग के लिए पंजीकृत हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन ट्रैक्टरों का बड़ा हिस्सा अब खेती-किसानी की जगह रेत, गिट्‌टी, मिट्टी, ईंट और अवैध कोयले जैसे खनिजों के परिवहन में व्यावसायिक तौर पर उपयोग किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा कृषि कार्य में प्रयुक्त ट्रैक्टरों को टैक्स में भारी छूट और सब्सिडी दी जाती है। एक ट्रैक्टर पर 20 हजार रुपए तक की टैक्स छूट और लाखों की सब्सिडी किसान वर्ग को दी जाती है। लेकिन इसका फायदा उठाकर कई वाहन मालिक ट्रैक्टरों को कमर्शियल कार्यों में लगाकर न केवल शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध खनन गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। खनिज विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ महीनों में जिले के विभिन्न ब्लॉकों – मनेंद्रगढ़, खड़गवां, पटना, बैकुंठपुर और जनकपुर में बड़ी संख्या में कृषि रजिस्टर्ड ट्रैक्टर अवैध खनिज परिवहन करते पकड़े गए हैं। जिला परिवहन अधिकारी अनिल भगत ने भी माना है कि टैक्स छूट के कारण कृषि ट्रैक्टरों का पंजीकरण अधिक होता है, लेकिन उनका उपयोग व्यावसायिक रूप में होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में खनिज और परिवहन विभाग मिलकर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अवैध कारोबारियों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती है। टैक्स छूट का दुरुपयोग कृषि कार्य में प्रयुक्त ट्रैक्टरों को कमर्शियल टैक्स नहीं देना पड़ता, जिससे वाहन मालिक हजारों की बचत करते हैं। लेकिन जब यही ट्रैक्टर खनिज या निर्माण सामग्री ढोने में लगते हैं, तो यह नियमों का उल्लंघन होता है और शासन को करोड़ों के राजस्व की हानि होती है। कार्रवाई की जा रही है ^जिला परिवहन अधिकारी अनिल भगत ने बताया कि अवैध उपयोग की जानकारी मिलने पर विभाग कार्रवाई करता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में पहुंच की दिक्कत और निगरानी तंत्र की कमी से अवैध कारोबारी फायदा उठा रहे हैं। जीपीएस से निगरानी जरूरी कृषि कार्य के नाम पर हो रहे इस दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए अब ट्रैक्टरों पर जीपीएस जैसी तकनीकों की मदद से निगरानी जरूरी है। साथ ही पंजीकृत ट्रैक्टरों का मासिक सत्यापन और उपयोग का रजिस्टर अनिवार्य किया जाना चाहिए।

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