सीएनटी एक्ट में थाना क्षेत्र की बाध्यता खत्म करने पर सहमति, बनेगा आयोग

ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) की अहम बैठक बुधवार को प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई। इसमें बसौढ़ी (घर बनाने के लिए जमीन) के लिए सीएनटी एक्ट में थाना क्षेत्र की बाध्यता खत्म करने पर सहमति बनी। फैसला हुआ कि राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग 1938 के निर्धारित थाना क्षेत्र के आधार पर सीएनटी के कार्यान्वयन के लिए प्रस्ताव बनाए। इसके लिए आयोग गठित करने पर भी फैसला हुआ, यह आयोग छह माह में सभी पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी। बैठक के बाद टीएसी सदस्य व झामुमो विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने कहा कि थाना क्षेत्र की बाध्यता खत्म करने के मुद्दे पर सभी लोग सहमत हैं। लेकिन राजस्व थाना या पुलिस थाना में से किस थाना क्षेत्र की बाध्यता खत्म करनी है, यह तय नहीं हो पाया है। अब आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इस मुद्दे पर फैसला लिया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। बैठक में इसके अलावा कई अहम मुद्दों की भी समीक्षा की गई। गौरतलब है कि भाजपा विधायक बाबूलाल मरांडी और चंपाई सोरेन ने इस बैठक का बहिष्कार कर दिया। वे बैठक में शामिल नहीं हुए। -शेष पेज 11 पर टीएसी की वैधता पर कहा-महाधिवक्ता ने बताया वैध बैठक में टीएसी की वैधता को लेकर उठे सवालों जैसे राजभवन, बुद्धिजीवी मंच और विधायक चंपाई सोरेन आदि की आपत्तियों पर भी चर्चा हुई। प्रो. मरांडी ने कहा कि इस मामले में महाधिवक्ता की राय ली गई थी और उन्होंने टीएसी को वैध माना है। वहीं पेसा नियमावली पर कहा कि पहले जेपीआर-1 में संशोधन होगा, उसके बाद ही पेसा नियमावली का गठन किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में 50% या इससे अधिक आदिवासी, वहां ग्राम सभा की सहमति से ही खुलेंगे शराब दुकान व बार प्रो. मरांडी ने बताया कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में जहां 50% या इससे अधिक आबादी आदिवासियों की है, वहां ग्राम सभा की अनुमति से शराब की दुकानें और बार खुल सकेंगे। अगर उन क्षेत्रों में फाइव स्टार या इंटरनेशनल होटल है तो उसमें भी बार के लिए ग्राम सभा की अनुमति जरूरी होगी। इन इलाकों में शराब की दुकानें चलाएगा कौन, यह सबकुछ ग्राम सभा पर छोड़ दिया गया है। ईचा बांध के निर्माण को फिर बहाल करने पर भी चर्चा सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के तहत पश्चिमी सिंहभूम में खरकई नदी में प्रस्तावित ईचा बांध के निर्माण का काम फिर बहाल करने पर चर्चा हुई। तय हुआ कि इस बांध से हो रहे विस्थापित जनजाति समुदाय सहित अन्य लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके ​फोटो और वीडियो के साथ जांच रिपोर्ट पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से पेश किया जाए। सीएम बोले-आदिवासी हितों पर चर्चा हुई : बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा-आदिवासी हितों पर कैसे काम हो, उनका समग्र विकास कैसे हो, भाषा-संस्कृति और सभ्यता कैसे संरक्षित हो, इन सारे मुद्दों पर बात हुई। भूमिहीनों को जमीन मामले की बात भी सामने आई। आदिवासियों की जमीन खरीद-बिक्री पर भी चर्चा हुई। थाना क्षेत्र की बाध्यता है, उसे कैसे देखा जाए, इस पर भी विचार-विमर्श हुआ। इस सभी मुद्दों पर विभाग को प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। उसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।

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