स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) नियम 2024 जारी किया है । इस संशोधित अधिनियम के तहत अब स्कूल प्रशासन किसी भी छात्र को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने से पहले विद्यालय से नहीं निकाल पाएगा। दरअसल, निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2010 के भाग में छात्रों की परीक्षा और कक्षा में रोके जाने के नियम में परिवर्तन किया गया है। अब हर शैक्षणिक वर्ष में पांचवीं व आठवीं कक्षा की परीक्षा अनिवार्य होगी। वहीं संशोधित अधिनियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई छात्र पदोन्नति से वंचित रहता है तो परिणाम जारी होने के दो माह के अंदर ही उसकी दोबारा से परीक्षा दिलवानी होगी। इसके बाद भी अगर छात्र परीक्षा को पास नहीं कर पाता तो उसे पांचवीं या आठवीं कक्षा में रोका जा सकता है। अब स्टूडेंट्स की सक्षमता को देखते हुए परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। कक्षा में रोके गए स्टूडेंट्स पर देना होगा विशेष ध्यान केंद्र सरकार की ओर से जारी राजपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि रोके गए छात्रों की एक सूची विद्यालय प्रशासन को बनानी होगी। स्कूल प्रशासन व शिक्षकों को उन छात्रों पर विशेष ध्यान देना होगा। समय-समय पर उनकी प्रगति की समीक्षा करनी होगी। विभाग को शिक्षकों की भी समीक्षा करनी चाहिए संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन िबट्टू ने बताया कि शिक्षा विभाग को शिक्षकों की समीक्षा करनी चाहिए। स्टूडेंट्स को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है। इससे वे बच नहीं सकते हैं।


