मध्यप्रदेश में 5 साल बाद चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा मामले:शहर में रोज 5-10 मरीज इसके लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंच रहे, दिल-किडनी पर भी डाल रहा असर

मध्यप्रदेश में वायरस जनित बीमारियों को लेकर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, बावजूद इसके लोगों में इस तरह की बीमारी तेजी से बढ़ते जा रही है। ताजा मामला चिकनगुनिया का है। इससे हाल ही में इंदौर में एक डॉक्टर की मौत हुई है। इस बीमारी के बारे में एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार चिकनगुनिया के वायरस का स्ट्रेन बदला है। यह मरीजों की हार्ट और किडनी पर असर डाल रहा है। यहीं कारण है कि चिकनगुनिया में व्यक्ति की इम्युनिटी इतनी कमजोर हो रही है कि पोस्ट चिकनगुनिया उन्हें अर्थराइटिस (गठिया) जैसी अन्य बीमारियां भी घेर रही हैं। चिकनगुनिया से उबरने के बाद मरीजों में जोड़ों का दर्द महीनों तक बना रहता है। इस बार कई मरीजों के चेहरे पर नाक और गालों के पास काले धब्बे (चिक साइन) दिख रहे हैं। रोजाना 5-10 मरीज इन लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। बीते पांच सालों से सबसे ज्यादा चिकनगुनिया के मामले 2024 में दर्ज किए गए हैं। इस साल अब तक 593 मामले सामने आ चुके हैं। जबकि 2019 में 756 मामले सामने आए थे। वह भी तब जब सरकार ने टेस्टिंग और केस की पुष्टि की प्रक्रिया को काफी जटिल बना रखा है। सिर्फ सरकारी अस्पताल में होने वाली जांच में पुष्टि होने पर ही मरीज को चिकनगुनिया पॉजिटिव माना जाता है। भोपाल, ग्वालियर और इंदौर बने हॉट स्पॉट प्रदेश के शहरी इलाकों, खासकर भोपाल, ग्वालियर और इंदौर, में चिकनगुनिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के बाद मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण यह बीमारी अधिक फैल रही है। चिकनगुनिया अब सिर्फ वायरल बुखार तक सीमित नहीं है। इसके गंभीर लक्षणों में जोड़ों का दर्द और अंगों पर सूजन के साथ हार्ट और किडनी को नुकसान पहुंचने के मामले भी सामने आ रहे हैं। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव की कागजी कार्रवाई का यह नतीजा है। सावधानी-बचाव के उपाय डॉक्टर्स बोले- प्लेटलेट्स कम होने से आती है कमजोरी चिकनगुनिया का मच्छर दिन में सक्रिय रहता है…
चिकनगुनिया एडिस मच्छर के काटने से फैलता है, जो दिन में अधिक सक्रिय होते हैं। मरीजों में तेज बुखार, जोड़ों में सूजन, एड़ी और पैरों में दर्द, और हाथ-पैरों में लाल चकत्ते देखने को मिलते हैं। प्लेटलेट्स कम होने से मरीजों को कमजोरी महसूस होती है।
-डॉ. सुमित रावत, वायरोलॉजी एक्सपर्ट व एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी मरीजों की त्वचा, मसल्स पर भी गंभीर प्रभाव…
चिकनगुनिया वायरस का नया स्ट्रेन मरीजों की त्वचा, मसल्स और हार्ट पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। मांसपेशियों में तेज दर्द (मायोसाइटिस) और स्किन में सूजन व खुजली जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ मामलों में हार्ट मसल्स में सूजन व हार्ट अटैक की घटनाएं भी देखी हैं।
-डॉ. प्रेक्षा द्विवेदी, एसोसिएट प्रोफेसर, व रूमेटोलॉजिस्ट, जीएमसी भोपाल

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