लुधियाना के जगराओं में शनिवार को ग्रामीण मजदूर यूनियन ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पुतले फूंके। बता दें कि संगरूर जिले में जींद रियासत के राजा की 927 एकड़ जमीन पर बेगमपुरा बसाने को लेकर विवाद गहरा गया है। पंजाब सरकार ने 20 मई को पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया। भूमि अधिग्रहण संघर्ष कमेटी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीण मजदूर यूनियन ने रसूलपुर, मल्ला और माणूके गांवों में मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले फूंके। यूनियन ने कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की है। जिला अध्यक्ष अवतार सिंह रसूलपुर और जिला सचिव सुखदेव सिंह माणूके का आरोप है कि सरकार भूमिहीन किसानों की 24,000 एकड़ उपजाऊ जमीन कॉर्पोरेट को देने की तैयारी कर रही है। लेकिन राजा की बंजर जमीन को भूमिहीनों में बांटने की बजाय, आंदोलनकारियों पर कार्रवाई कर रही है। भूमि हदबंदी कानून लागू नहीं करने का आरोप मजदूर नेताओं का कहना है कि भूमिहीन दलित मजदूर कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं। जाति व्यवस्था के कारण सदियों से उन्हें जमीन से वंचित रखा गया। आजादी के 77 साल बाद भी उनके पास न जमीन है, न मकान। नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों की तरह वर्तमान सरकार भी भूमि हदबंदी कानून लागू नहीं कर रही। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग जब भी मजदूर अपनी जमीन मांगते हैं, सरकार और पुलिस जमींदारों का साथ देती है। मजदूर संगठनों ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है। इस मौके पर निर्मल सिंह निम्मा, दर्शन सिंह, भाग सिंह, कुलवंत सिंह, सतनाम सिंह, हरदेव सिंह, निर्भय सिंह और चमकौर सिंह मौजूद रहे।


