झीरम का बदला लेने ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई होनी थी:पति को खो चुकी अनिता बोलीं- बड़े लोगों को बचाने के लिए जांच दबा दी

पहलगाम आतंकी हमले में धर्म पूछ कर आतंकवादियों ने लोगों को गोली मारी। 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों ने नाम पूछ-पूछकर कांग्रेस नेताओं को गोली मारी। मानो उनके पास कोई लिस्ट हो जिसे वह नाम पूछ कर चेक कर रहे थे और नेताओं को गोली मार रहे थे। इस घटना में रायपुर के धरसींवा इलाके के कांग्रेस नेता योगेंद्र शर्मा की भी हत्या कर दी गई । पति की मौत के बाद पत्नी अनिता को जनता ने विधायक बनाया था। अनीता कह रही हैं कि पहलगाम घटना के बाद जैसे ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया, झीरम हमले के बाद भी ऐसा ऑपरेशन किया जाना था, मगर तब किसी ने ऐसी कार्रवाई नहीं की। घटना के बाद NIA की जांच हुई इससे अनिता और दूसरे पीड़ित संतुष्ट नहीं हैं। पिछली कांग्रेस सरकार ने SIT बनाकर जांच करवानी चाही मगर अदालती दांवपेंच में फंसकर ये जांच भी एक कदम आगे न बढ़ सकीं। घटना के 12 साल बाद कई सवालों के साथ अनीता योगेंद्र शर्मा जी रही हैं, दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने क्या कुछ कहा पढ़िए उनके शब्दों में। सवाल- घटना के इतने सालों बाद भी क्या सवाल हैं मन में जो बैचेन करते हैं आपको ?
जवाब- जो जांच होनी थी वह जांच आज तक नहीं हो पाई है । नाम पूछ कर वहां गोली मारी गई। यह जांच का बिंदु है कि नक्सलियों को आखिर किसने यह निर्देश दिए थे । वहां जो कुछ हुआ वो तो जैसे सुपारी किलिंग की तरह ही था। तो किसके कहने पर इस तरीके का नरसंहार किया गया, यह जांच के बिंदु हैं। जब सरकार आई कांग्रेस की प्रदेश में पिछली बार, तो हमारी सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी भी इसमें काफी हद तक लगे हुए थे। SIT भी गठित की गई थी लेकिन केंद्र सरकार ने सपोर्ट नहीं किया। कहीं ना कहीं किसी को बचाना चाहते हैं इस वजह से जांच अधूरी है। सवाल- बतौर पत्नी इतने सालों बाद आपके मन मंे क्या आता है कि क्या किया जाए, घटना के बाद ?
जवाब- नक्सलियों से मेरे परिवारों की कोई पर्सल दुश्मनी नहीं है। मगर इस साजिश को अंजाम देने वालों का पर्दाफाश होना चाहिए। जैसे आज ऑपरेशन सिंदूर में जिस तरीके से घर में घुसकर मारे हैं, वैसे ही घर में घुसकर मारना था नक्सलियांे को और उनके साथ साजिश करने वालों को। उस समय यह लोग कहां थे हमारा दर्द नहीं दिखा भाजपा की सरकार को । हम रोते रहे, बिलखते रहे, 5 साल तक। डॉक्टर रमन सिंह से गुहार लगाते रहे उन्होंने नहीं सुनी । अगर हमारी पीड़ा समझते तो हमारा सहयोग करते । सवाल- आपको इतने सालांे मंे क्या समझ आया कौन होगा इस कांड के पीछे ?
जवाब- इसमें साफ-साफ एक ही बात नजर आती है, जो मुझे लगता है कि इसमें कई बड़े लोग शामिल हैं। उन बड़े लोगों को बचाने के लिए ही केंद्र की जो सरकार है उसने जांच को, जैसे चाह रहे हैं वैसे नहीं होने दिया। उस समय भाजपा की ही सरकार थी, न परिवार के लोगों से बात की, न प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हुए, न फोन ट्रेस किए गए। अनिता ने आगे कहा- मेरे पति का फोन लेकर नक्सली भागे थे, मोबाइल ट्रेस किए होते तो मेरे पति के जो गुनहगार हैं जिन लोगों ने हत्या की है वह हत्यारे पकड़े जाते। लेकिन सरकार नहीं चाह रही थी उसे समय रमन सिंह की सरकार थी, वह मुख्यमंत्री थे। सरकार बिल्कुल नहीं चाह रही थी। जब नरसंहार हो रहा था उसे समय न पुलिस थी ना कोई था, 4:00 बजे की घटना है 7:00 बजे पुलिस आई है। इतनी देर तक शायद इसलिए इंतजार करते रहे कि जो बचे हैं सबको मार दिया जाए । सवाल- पति से आपकी बात कब हुई थी, कैसे आप लोगों को घटना के बारे में पता चला ?
जवाब- उनसे मेरी उस दिन तो बात नहीं हुई थी एक दिन पहले रात में बात हुई थी । उन्होंने बताया था कि सुबह जल्दी निकलेंगे यात्रा पर और उसके बाद रायपुर लौट आना है। हमें अगले दिन बस पता चला कि छोटा सा एक्सीडेंट है, बाद में नक्सल हमले की बात मीडिया में आई। हम फोन लगाते रहे, दूसरे दिन तक हमने फोन लगाया। रिंग जा रही थी पर कॉल कोई रीसिव नहीं कर रहा था। हमें बताया गया था कि वो जख्मी हैं रायपुर लाया जा रहा है। मगर बुरी खबर आई। सवाल- आपको क्या लगता है चूक कहां हुई ?
जवाब- सरकार अगर चाहती तो मोबाइल ट्रेस करके उनकी लोकेशंस हासिल कर सकती थी , सर्च ऑपरेशन कर सकती थी और वह लोग पकड़े जाते हैं जो घटना में शामिल थे। आखिर 500 से 1000 नक्सली कैसे उस समय एक साथ जमा हुए और हमला कर दिया। कैसे इतनी बड़ी प्लानिंग की और मूवमेंट की पता ही नहीं चला सरकार को, क्या सो रही थी सरकार, सरकार के लोग क्या सो रहे थे। ऐसे में हम तो यही समझेंगे न कि वह इंतजार ही कर रहे थे इस नरसंहार का। सवाल- आज प्रदेश में एंटी नक्सल ऑपरेशन जारी है बड़े नक्सली लीडर मारे गए क्या आप इसे न्याय के तौर पर देख पा रही हैं ?
जवाब- देखिए 25 मई को जो नक्सली कांग्रेस नेताओं को मार रहे थे, वहां, मैं तो चाहूंगी कि उन नक्सलियों को मारा जाए, उन्हें पकड़कर पूछा जाए कि उनके आका कौन थे, किनके कहने पर उन्होंने नाम पूछ कर लोगों को मारा। तब तो न्याय मानूंगी। सवाल- NIA की जांच हुई, कोई बातचीत आपसे भी हुआ या कोई बयान लिया गया ?
जवाब- हमसे कोई पूछताछ नहीं हुई है, कोई बयान नहीं लिया गया है किसी प्रत्यक्षदर्शी से भी एनआईए ने बात नहीं की। एनआईए की जांच पूरी हो गई ऐसा हमें भी पता चला तो हमने भी आपत्ति लगाई कि हम इस जांच से संतुष्ट नहीं है, फिर से जांच होनी चाहिए यह लगातार हम मांग कर रहे हैं और करते रहेंगे। सवाल- 12 साल बीत गए घटना को, आप क्या चाहती हैं कि क्या हो ?
जवाब- साल तो बीत गए, मगर जो जख्म है वह अभी भी हरा है। जो दुख है, जो पीड़ा है, पति को खोने का जो दुख है, उसको मैं नहीं भूल सकती । वह दुख हम लोगों को हर 25 मई को याद करते हैं।
(इतना कहकर अनिता योगेंद्र शर्मा की आंखें नम हो गईं, उनका गला भर आया, वो शांत हो गईं,रिपोर्टर ने भी आगे कोई सवाल नहीं किया)

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