भास्कर न्यूज | चाईबासा सरना धर्म कोड की मांग को लेकर झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्णय लिया है कि सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे से राजभवन रांची के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कांग्रेस के जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने प्रदर्शन के संदर्भ में जानकारी देते हुए रविवार को बताया कि झारखण्ड एक आदिवासी बहुल्य राज्य है जो सरना धर्म को मानने वाले प्राचीन परम्पराओं एवं प्रकृति के उपासक है। सरना धर्म का जीता जागता ग्रन्थ जल जंगल जमीन एवं प्रकृति है। सरना धर्म की संस्कृति पूजा पद्धति, आदर्श एवं मान्यताएं प्रचलित सभी धर्मों से अलग है। पेड़ों पहाड़ों की पूजा तथा जंगलों को संरक्षण देने को ही ये अपना धर्म मानते है। आदिवासी सरना समुदाय पिछले कई वर्षों से अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए जनगणना कोड में सरना धर्म को शामिल करने की मांग करते रहे है। त्रिशानु राय ने कहा कि हिन्दु, मुस्लिम, सिख, इसाई, बौद्ध, जैन के लिए कोड निर्धारित है लेकिन आदिवासी सरना धर्म वालों के लिए जनगणना फॉर्म में अलग से कोड नहीं दिया गया है। झारखण्ड विधानसभा में भी प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार से सातवां कॉलम जोड़कर आदिवासियों के लिए सरना धर्म को शामिल करने की मांग की गई है पर केन्द्र सरकार मौन है। धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में जगन्नाथपुर के विधायक सह उप मुख्य सचेतक सत्तारुढ़ दल सोनाराम सिंकु , कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर दास सहित तमाम कांग्रेसजन उपस्थित होकर प. सिंहभूम जिला का प्रतिनिधित्व करेंगे।


