दिव्यांग यूनिवर्सिटी की कुलपति भंडारी का निधन:मौत के बाद नेत्रदान, जीवन भर नेत्रहीनों और दिव्यांगों के लिए किया काम

जोधपुर के दिव्यांग यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉक्टर कुसुम लता भंडारी का सोमवार को निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4:30 बजे किया जाएगा। बता दे कि उनके निधन के बाद शिक्षा से लेकर समाज सेवा जगत में शोक की लहर छा गई हैं। हाल में कुसुमलता भंडारी (69) ने 19 दिसंबर को अपना जन्म दिवस मनाया था। वे खुद दिव्यांग होने के साथ ही जीवन भर दिव्यांगों के उत्थान को लेकर समर्पित रहीं। आजीवन पोलियो से ग्रसित भंडारी प्रज्ञा निकेतन अंध छात्रावास की संस्थापक और मुख्य संचालिका भी रहीं। अपने जीवनकाल में सैकड़ों दिव्यांग छात्र-छात्राओं को शिक्षित कर मार्गदर्शन दिया। 3 साल की उम्र में हुआ था पोलियो भंडारी पिछले 15 दिनों से बीमार थी और उनका एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। जीवनभर दिव्यांग और दृष्टिहीनों के लिए काम करने वाली भंडारी के निधन के बाद उनके नेत्रदान करवाए गए। बता दे कि भंडारी का जन्म 1955 में हुआ था। महज 3 साल की आयु में ही उन्हें पोलियो हो गया था। उसके बाद कुसुमलता ने बड़े होने पर राजनीति विज्ञान में PHD और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी में नियुक्त हुई। उन्हें राष्ट्रपति से पुरस्कार भी मिल चुका हैं।

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