टोंक के 1079वें स्थापना दिवस पर पुरानी टोंक स्थित गढ़ से विधिवत पूजा और इबादत के साथ मंगलवार को टोंक महोत्सव का भव्य आगाज हुआ।
महोत्सव की शुरूआत में सुबह टोंक महोत्सव समिति के अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंहल, गढ़ परिवार के हनुमान सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार, गजराज सिंह, प्रदीप सिसोदिया समेत वरिष्ठ नागरिकों ने शहर के प्राचीनतम मंदिर में पूजा अर्चना की। टोंक महोत्सव समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व नगर परिषद चयरमैन लक्ष्मी देवी जैन ने कहा कि टोंक एक गौरवशाली शहर रहा है और इसका एक शानदार इतिहास है। महोत्सव के माध्यम से हम हमारी नई पीढ़ी को हमारे इस इतिहास से परिचित कराने का काम बखूबी कर सकते हैं। लक्ष्मी देवी ने टोंक महोत्सव के प्रणेता हनुमान सिंहल का श्रद्धा से स्मरण करते हुए कहा कि सिंहल ने टोंक का इतिहास लिखकर इस शहर के बेतरतीब इतिहास को क्रमबद्ध किया। ‘टोंक की परंपराए और इतिहास है अनूठा’
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व निदेशक मुजीब आजाद ने कहा कि टोंक मुहब्बत करने वालों का शहर है और यहां की परंपराए और इतिहास अपने आप में अनूठे हैं। आजाद ने कहा कि यह शहर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा है और हर मुश्किल के बाद इसने कामयाबी की इबारत लिखी है। ‘टोंक की संस्कृति भाईचारे की संस्कृति’
वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि टोंक शहर की संस्कृति भाईचारे की संस्कृति है। हम सब लोग बरसों से एकता के सूत्र में बंधे है और हम जमाने को यह दिखाना चाहते है कि यदि हम सब एक हैं तो इसका कारण यह है कि हमारी बुनियाद प्रेम और निष्ठा पर टिकी है। उन्होने कहा कि किसी भी शहर की पहचान को पुख्ता करने के मकसद से महोत्सव मनाया जाता है और इसका स्वरूप कैसा भी हो मकसद यही होता है कि हम अपने शहर के प्रति जागरूक हो। ‘आने वाली पीढ़ियां करेंगी गर्व’
राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार ने स्वागत भाषण में कहा कि टोंक महोत्सव के प्रणेता हनुमान सिंहल साहब ने जीवन के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किए पर टोंक महोत्सव का आयोजन कर उन्होने ऐसा काम कर दिखाया है जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व करेंगी।
गढ़ परिवार के उमराव सिंह सोलंकी ने कहा कि टोंक महोत्सव से प्रत्येक नागरिक को जुड़ना चाहिए। यह यहां के हर नागरिक का महोत्सव है और हर नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी करना चाहिए । टोंक महोत्सव समिति के अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंघल ने कहा कि जब तक हम अपनी जमीन से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ेंगे, तब तक यह शहर ऊंचाईयां नहीं छू सकता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक हनुमान सिंह सोलंकी ने टोंक महोत्सव के बहाने हम हमारे बुजुर्गों को भी याद कर लेते है जिनके दम से इस शहर के जनजीवन में खुशहाली के रंग भरे है।


