मेडिकल कॉलेज में प्रमोशन-पोस्टिंग में गड़बड़ी:स्पोर्ट्स टीचर की पेंशन 13 साल रोकी, कोर्ट ने 40 लाख ब्याज के साथ दिलाए 1 करोड़, ऐसे 2 दर्जन केस पेंडिंग

मेडिकल कॉलेज के स्पोर्ट्स टीचर को रिटायरमेंट के 15 साल बाद अब पेंशन मिलेगी। कॉलेज प्रशासन को 15 साल की बकाया पेंशन के रूप में ब्याज समेत करीब एक करोड़ रुपए देना पड़ा। स्पोर्ट्स टीचर रतिंद्र बोस ने लगभग 31 साल कॉलेज नौकरी की 2010 में उन्होंने वीआरएस ले लिया। लेकिन तब अफसरों ने उनकी नियुक्ति को फर्जी बताते हुए पेंशन रोक दी। स्पोर्ट्स ऑफिसर को कोर्ट से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। मेडिकल कॉलेज में ये अकेला केस नहीं है। मेडिकल कॉलेज में ऐसे 2 दर्जन केस पेंडिंग हैं।
मेडिकल कॉलेज में करीब 15-17 साल पहले की गई नियुक्ति और प्रमोशन को लेकर कोई न कोई विवाद है। अब जब अफसर और बाबू रिटायर हो रहे हैं, तब उनका सर्विस रिकार्ड चेक करने पर गड़बड़ी सामने आ रही है। नियुक्ति को लेकर कहा जा रहा है कि नियमों के अनुसार नहीं की गई है जबकि प्रमोशन में भी मापदंडों का पालन न होने का हवाला देकर पेंशन रोकी जा रही है। भास्कर ने पड़ताल की तो अलग-अलग कहानी सामने आई। 1977 में हुई थी स्पोर्ट्स टीचर की नियुक्ति, दिया था वीआरएस का आवेदन
मेडिकल कॉलेज में स्पोर्ट्स टीचर रतिंद्र बोस की नियुक्ति 1977 में की गई थी। उस समय डॉक्टर एस एल अग्रवाल मेडिकल कॉलेज के डीन थे। पूरी नौकरी उन्होंने रायपुर मेडिकल कॉलेज में की। रिटायरमेंट के 2 साल पहले उन्होंने वीआरएस का आवेदन दे दिया। लेकिन उनकी पेंशन रोक दी गई। रतिंद्र बोस अपनी पेंशन के लिए उनके समक्ष उपस्थित हुए। उन्हें बताया गया कि रतिंद्र बोस की नियुक्ति मापदंडों के अनुसार नहीं हुई है। कुछ दिन दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद रतिंद्र बोस कोर्ट चले गए। अब उनके पक्ष में फैसला आया है। मौत के 4 साल बाद भी पेंशन नहीं
मेडिकल कॉलेज के फिजिसिस्ट राजेश चंदोला की मृत्यु के चार साल बाद भी उनके परिवार को पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई है। उनकी भी नियुक्ति और प्रमोशन पर सवाल उठाकर पेंशन रोकी गई है। करीब 32 साल उन्होंने मेडिकल कॉलेज में नौकरी की। उनकी असयम के बाद ये बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति तदर्थ हुई थी। तदर्थ नियुक्ति में प्रमोशन का प्रावधान नहीं होता। इसके बावजूद उन्हें प्रमोशन दिया गया। उनकी पत्नी ने कोर्ट में लड़ाई जीत ली है। कोर्ट से करीब 30 लाख पेंशन का आदेश हुआ है। 18 लैब सहायक की पेंशन भी अटकी
मेडिकल कॉलेज में 18 ऐसे कर्मचारियों की पेंशन भी अटकी हुई है जिन्हें 15-16 साल पहले चपरासी से लैब सहायक के रूप में प्रमोशन दिया गया था। 35- 36 साल की सेवा करने के बाद इन कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन की सुविधा नहीं मिल रही है। इसके पीछे भी सिस्टम ही जिम्मेदार है। शासन स्तर पर इन सभी की पेंशन यह तर्क देकर के रोकी गई है कि उनका प्रमोशन नियमों के अनुसार नहीं किया गया है। इसकी कोई स्पष्ट गाइड लाइन नहीं थी। पड़ताल में पता चला है कि इन कर्मचारियों को भी जिन्होंने प्रमोशन दिया वे अधिकारी अब इस दुनिया में नहीं है। इसलिए यह पता नहीं चल पा रहा है कि उन्हें किन नियमों के तहत प्रमोट किया गया था। सीधी बात- डॉ विवेक चौधरी, डीन, मेडिकल कॉलेज तकनीकी कारणों से अटके पेंशन प्रकरण क्यों अटके है।
– सभी के तकनीकी कारण है शासन स्तर पर रोका गया है। लेकिन तकनीकी समस्या तो मेडिकल कॉलेज से ही हुई है।
– हां लेकिन उस समय किन परिस्थितियों में प्रमोशन दिया गया इसकी जानकारी नहीं है। अब आगे क्या होगा।
– अब हम प्रमोशन को लेकर सजग हो गए हैं। अब ऐसी दिक्कत नहीं आएगी।

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