इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने 23 हजार से ज्यादा धान की प्रजातियों के संग्रह, जेट्रोफा के जर्मप्लाज्म, सब्जी-भाजी, फल समेत सैकड़ों रिसर्च कर दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई। हालांकि यह अब प्रबंधन की प्रारंभिक अनदेखियों व चूक की वजह से वित्तीय संकट में उलझ गया है। 40 बरसों का गौरवशाली इतिहास समेटे आईजीकेवी के 27 कृषि विज्ञान केंद्रों के संचालन का संकट खड़ा हो गया है। कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल ने सीएम से मिलकर परिस्थितियों से अवगत कराया है। उनसे मदद व मार्गदर्शन मांगा है। आईजीकेवी की स्थापना के वक्त यहां के प्रोफेसरों व स्टाफ के वेतन भत्तों को लेकर नीति नहीं बनाई गई। बताते हैं कि न तो दूसरे सरकारी विभागों की तरह स्टाफ के वेतन से कटौतियां की गई और न ही अलग से मद का प्रावधान ही किया गया। इसके बाद अब मामला न्यू पेंशन स्कीम में भी फंस गया है। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 2012 में कृषि विज्ञान केंद्रों के स्टाफ के वेतन-भत्तों, मेडिकल भत्तों व सेवानिवृत्ति लाभ को लेकर एमओयू किया था।


