सेना के झंडे, वर्दी में अफसर…लेकिन है फर्जी ट्रेनिंग सेंटर:मैनपुरी में सेना भर्ती के नाम पर 600 को ठगा; मां कर रही 5000 में नौकरी

यूपी के मैनपुरी का किशनी इलाका। यहीं जटपुरा चौराहे के पास 22 बीघा खाली जमीन है। इसमें सेना की अलग-अलग बटालियन के झंडे लगे हैं। बड़े-बड़े टायर, ऊंचे-ऊंचे पोल लगे हैं। इसमें रस्से बंधे हैं। निशानेबाजी के लिए शूटिंग टारगेट लगा रखे हैं। इस सबको देखने से किसी को भी लग सकता है कि यह आर्मी का ट्रेनिंग कैंप है। लेकिन, ऐसा नहीं है। असल में यह ठगी का अड्डा है। सेना में भर्ती की ट्रेनिंग करवाने, नौकरी देने के इस खेल में सैकड़ों युवा फंसे। उनसे करोड़ों रुपए ठग लिए गए। अनुमान के मुताबिक, 4 साल में करीब 600 लोगों को शिकार बनाकर 18 करोड़ रुपए ठगे गए हैं। पुलिस ने इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड अरविंद पांडेय और उसकी एक असिस्टेंट को गिरफ्तार किया है। मामला सेना से जुड़ा था, इसलिए आर्मी भी एक्टिव हो गई। इस हाईप्रोफाइल मामले की हकीकत जानने दैनिक भास्कर की टीम भी ग्राउंड जीरो पर पहुंची। अरविंद पांडेय एडिटेड फोटो बनाकर भौकाल जमाता था। मीडिया चैनल खोल लिया, एक पार्टी बना ली, एनजीओ भी खोला। अरविंद की मां 3 मंदिर में सफाई और पूजा-पाठ करती हैं। उनसे जो कुछ पता चला वह हैरान करता है। 22 बीघा जमीन किराए पर ली और कैंप बनाया
मैनपुरी जिला मुख्यालय से करीब 36 किलोमीटर दूर किशनी तहसील है। यहीं से थोड़ी दूर पर एक डिग्री कॉलेज है। उसके ठीक सामने 22 बीघा खाली जमीन है। यह जमीन अनिल यादव और उनके भाई की है। जिसका हर महीने करीब 25 हजार रुपए किराया लेते हैं। पिछले 4 साल से इस जमीन पर भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स नाम से ट्रेनिंग कैंप चलाया जा रहा था। दावा किया जाता था कि एक फिक्स अमाउंट जमा करने के बाद यहां रहने-खाने से लेकर ट्रेनिंग की पूरी व्यवस्था होती थी। यह भी कहा जाता था कि अगर आर्मी या फिर सेना में नौकरी नहीं मिली, तो कहीं न कहीं सिलेक्शन करवा दिया जाएगा। 3 जून को तेलंगाना के करीमनगर जिले के अशोक अपने 6 साथियों के साथ किशनी पहुंचे। ये सभी इस ट्रेनिंग कैंप से ट्रेनिंग ले चुके हैं। किशनी थाने में उन लोगों ने ट्रेनिंग कैंप के प्रमुख अरविंद पांडेय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इसमें अशोक की तरफ से कहा गया- 21 जून, 2024 को यूट्यूब पर एक विज्ञापन देखा। इसमें अरविंद पांडेय 2 से 3 लाख रुपए लेकर सीआरपीएफ, एयरफोर्स, नेवी, आर्मी की ट्रेनिंग देने के बाद नौकरी लगवाता है। मेरे कहने पर सागर, चंद्रशेखर, श्रीकांत, रवितेजा, विजय और लक्ष्मण ने 1 लाख 20 हजार रुपए ऑनलाइन और फिर 1 लाख 30 हजार रुपए नकद देकर एडमिशन करवाया। अशोक आगे कहते हैं- 3 महीने बीत गए, न किसी की नौकरी लगी और न ही किसी को पैसा वापस दिया गया। अरविंद अब फोन नहीं उठाते। ऐसा लगता है कि अरविंद कुमार पांडेय सेना की वर्दी पहनकर लोगों को गुमराह और धोखाधड़ी कर रुपए ऐंठता है। अशोक की इस एफआईआर के बाद पुलिस एक्टिव हुई। थाने से करीब 2 किलोमीटर दूर चल रहे इस कैंप के प्रमुख अरविंद और एक ट्रेनर को गिरफ्तार कर लिया। सेना से जुड़ा मामला था, इसलिए सेना के अधिकारी भी थाने पहुंच गए। सख्ती ऐसी कि जब तक अरविंद से पूछताछ चली, थाने के अंदर किसी और व्यक्ति की एंट्री रोक दी गई। मां बोली- 20 साल से अरविंद से कोई मतलब नहीं
हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर अरविंद पांडेय कौन है? ठगी कैसे करता था? इन सवालों के जवाब तलाशने हम मैनपुरी पहुंचे। हमारे पास अरविंद का जो आधार कार्ड था, उसमें पता हरियाणा के फरीदाबाद का था। लेकिन अरविंद मूलरूप से मैनपुरी के गाड़ीवान इलाके का है। पिता का नाम जानकी प्रसाद और मां का नाम मीरा है। मैनपुरी में हमारी मुलाकात बजरंग राइस मिल के राधा-कृष्ण मंदिर में मीरा से हुई। मीरा यहां दोनों वक्त मंदिर की साफ-सफाई और पूजा-पाठ करती हैं। इसके अलावा भी वह दो अन्य मंदिरों पर भी यही काम करती हैं। इससे उन्हें 5 हजार रुपए महीने मिलते हैं। मीरा से उनके बेटे अरविंद के बारे में पूछा। वह कहती हैं- हमारा उससे कोई मतलब ही नहीं। वह तो 15-20 साल पहले ही छोड़कर चला गया था। अब कहां है, किस हालत में है, क्या कर रहा, इसकी कोई जानकारी नहीं। यह सब बोलते हुए वह झल्ला जाती हैं। कहती हैं कि हम कोई बात नहीं करेंगे। लेकिन, थोड़ा समझाने पर वह फिर से बात करने के लिए तैयार हो जाती हैं। मीरा कहती हैं- हमारे 6 बच्चे हैं। 4 बेटियां और दो बेटे। अरविंद सबसे बड़ा बेटा है। 23 साल पहले हम लोग मैनपुरी के राजपुरा इलाके में रहते थे। लेकिन, विवाद के बाद हम सब मैनपुरी के गाड़ीवान आ गए। अरविंद की शादी की, लेकिन उसके बाद परिवार में झगड़ा होने लगा। वह हम सबको छोड़कर चला गया। सभी 4 बेटियों की शादी हमने की। आखिरी बेटी की शादी के वक्त तो स्थिति यह थी कि घर में पैसा ही नहीं था। किसी तरह से कर्ज लेकर शादी की। बर्तन तक नहीं दे पाए थे उसे। अरविंद ने कभी कोई मदद नहीं की। पति से भी हमारा कोई मतलब नहीं रहता। ठगी के लिए खुद को आर्मी अफसर बताता
परिवार से मिलने के बाद अब हम उन लोगों को खोज रहे थे, जो अरविंद पांडेय के काले कारनामों के बारे में बता सकें। हम तेलंगाना के उन लड़कों से मिलना चाहते थे, जिन्होंने शिकायत की थी। इसके लिए किशनी थाना पहुंचे। थाने के बाहर एक सिपाही और दो चौकीदार बैठा दिए गए। कहा गया कि किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। मीडिया से होने के चलते हम अंदर गए, लेकिन हमारी मुलाकात उन लोगों से नहीं हो पाई। थाने के दरोगा भी कहते हैं कि इस मामले पर हमें बोलने से रोका गया है, बड़े अधिकारी ही बात करेंगे। इसके बाद हमें कन्नौज का एक लड़का मिला। जो इस ट्रेनिंग सेंटर से ट्रेनिंग ले चुका था। पहचान न उजागर करने की शर्त पर उसने बताना शुरू किया। बताया- इस सेंटर में एडमिशन के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए फीस लगती है। 2100 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस अलग से लगती है। उस वक्त जो एग्रीमेंट होता है उसमें कहा जाता है कि 3 महीने तक ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अगले 6 महीने तक ट्रेनिंग के साथ 14 हजार 800 रुपए भी दिए जाएंगे। इसके बाद अगर युवा चाहेंगे, तो उन्हें किसी नेता या अभिनेता की सुरक्षा की ड्यूटी में भी लगवा दिया जाएगा। अरविंद खुद को आर्मी से रिटायर्ड बताता था। लड़के लाने वालों को मोटा कमीशन देता था
अरविंद के साथ काम कर चुके एक व्यक्ति कहते हैं- कैंप में आपको लोकल लड़का नहीं मिलेगा। ज्यादातर दूसरे राज्यों से या फिर दूसरे जिलों से आए लड़के मिलेंगे। इसने बाकायदा पूरे देश में वेंडर बना रखे हैं। वे वेंडर लड़कों को अपने झांसे में लेते हैं। उन लड़कों से 2 से 3 लाख रुपए लेते हैं। 1 लाख 20 हजार रुपए अरविंद को देते हैं, बाकी खुद रख लेते हैं। अरविंद हमसे भी कहता था कि क्लाइंट ले आइए और 1 लाख 20 हजार रुपए हमें देकर बाकी जितना ले सकते हैं, उतना खुद रख लीजिए। अरविंद शातिर है और बहुत होशियारी से काम करता था। वह समय-समय पर सेना से जुड़े लोगों का प्रोग्राम करवाता और उसमें उन्हें सम्मान देता था। पिछले दिनों उसने अपने कैंप में बिजली के कनेक्शन को लेकर सड़क जाम की थी। अधिकारी उसे समझाने गए थे, बाद में बिजली का कनेक्शन भी मिल गया था। उधर से रोज तमाम अधिकारी आते-जाते थे, लेकिन कभी किसी ने कैंप पर सवाल नहीं उठाया। जब मामला खुला तो पुलिस ने वहां पहुंचकर मौजूद लड़कों को खदेड़ा। एडिटेड फोटो बनाकर भौकाल जमाता था
अरविंद के बारे में कई और चीजें पता चलीं। उसने हिंदुस्तान रक्षा धर्म मोर्चा नाम से पार्टी बना रखी है। इस पार्टी की टैग लाइन है- ‘राजनीति में हो भागीदारी-लोकसभा में आधी नारी।’ इसके अलावा उसने HRD नाम से न्यूज चैनल की भी शुरुआत की है। इसका हेड ऑफिस उसने मैनपुरी शहर में ही बनाया है। अभी करीब 7-8 लोग इसमें काम कर रहे हैं। अरविंद ने कुछ लोगों को 50 हजार रुपए की सैलरी देने की बात कह रखी थी, लेकिन पैसा नहीं दिया। इसके बाद कई लोगों ने साथ छोड़ दिया। अरविंद भौकाल जमाने के लिए एडिटेड फोटो बनाकर उसे शेयर करता था। एक तस्वीर में वह सीएम योगी के स्थान पर खुद बैठा है। पीछे हिंदुस्तान रक्षा धर्म का पोस्टर लगा है। एक तरफ यूपी के मुख्य सचिव संजय प्रसाद और दूसरी तरफ पूर्व एडीजी प्रशांत कुमार बैठे नजर आते हैं। इसी तरह से उसने तमाम जवानों के साथ फोटो बनवाकर उसे अपने कैंप में लगा रखा है। आखिर अब तक कभी कोई शिकायत क्यों नहीं हुई
हमने अरविंद से जुड़े एक व्यक्ति से सवाल किया कि अब तक उसके खिलाफ शिकायत क्यों नहीं हुई? वह कहते हैं- अरविंद स्थानीय लड़कों का एडमिशन लेने से बचता था। वह बाहर के राज्यों से भी एक समूह में आए लड़कों का एडमिशन नहीं चाहता था। ऐसा वह इसलिए करता था, क्योंकि स्थानीय व्यक्ति रोज कैंप में पहुंचकर हंगामा कर सकते हैं। ग्रुप में आए लोग इकट्ठा होकर शिकायत कर सकते हैं। एक अकेले व्यक्ति को झूठ बोलकर या फिर डराकर चुप करवाया जा सकता है। तेलंगाना के एक साथ 6 लड़कों का एडमिशन लेकर वह फंस गया। इसलिए पहली बार उसकी असलियत सामने आई है। अभी तक कितनी गिरफ्तारी?
गिरोह के सरगना अरविंद कुमार पांडेय और उसकी असिस्टेंट सुमित्रा सेनापति को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से नकली दस्तावेज, फर्जी जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड, नकली गन, लैपटॉप, मोबाइल, यूनीफॉर्म समेत भारी मात्रा में सामान बरामद हुआ है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में पंचायत चुनाव जीतो, विधायकी का टिकट पाओ, कांग्रेस का ऐलान, 403 सीटों पर तैयारी शुरू की यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जमीनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। 100 दिन के संगठन सृजन कार्यक्रम में पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटी है। साथ ही पार्टी 2027 को लेकर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को तीन श्रेणियों A, B और C में बांटा है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पंचायत चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारेगी। पंचायत चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाले और ज्यादा सदस्य बनाने वालों को पार्टी विधानसभा चुनाव में टिकट देगी। पढ़ें पूरी खबर

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