आरयू में 1.60 लाख और डीएसपीएमयू के यूजी और पीजी कोर्सों में पढ़ते हैं 16 हजार स्टूडेंट्स लोकतंत्र को बचाए रखने और राजनीति की बेहतर समझ के लिए विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव का प्रावधान किया गया है। ताकि छात्रों में गलत के विरोध में एकजुट होकर सवाल करने की हिम्मत विकसित हो सके। कई बड़े नेता छात्र संघ चुनाव से निकल कर आए हैं, इसलिए छात्र संघ चुनाव को राजनीति की नर्सरी भी कहा जाता है। लेकिन यह नर्सरी छात्र संघ चुनाव रूपी खाद-पानी नहीं मिलने के कारण सूखने लगी है।
रांची यूनिवर्सिटी, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) समेत राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में पिछले पांच साल से छात्र संघ के चुनाव नहीं कराए गए हैं। लेकिन छात्रों से चुनाव के नाम पर हर साल शुल्क लिए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन चुनाव कराना भूल गया है। रांची यूनिवर्सिटी में पिछले पांच साल में यूजी-पीजी के छात्रों से चार करोड़ रुपए वसूले गए हैं। वहीं डीएसपीएमयू प्रशासन द्वारा पिछले पांच साल में 80 लाख रुपए चुनाव के नाम पर छात्रों से लिए गए हैं। बताते चलें कि रांची विवि में 1.60 लाख छात्र हैं। यहां प्रत्येक छात्र से चुनाव शुल्क के नाम पर 50 रुपए लिए जाते हैं। वहीं डीएसपीएमयू में 16 हजार छात्र हैं। यहां प्रत्येक छात्र से 100 रुपए शुल्क लिए जाते हैं। राज्य के विश्वविद्यालयों में अघोषित रूप से छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी गई है। लोकतांत्रिक राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए छात्र राजनीति जरूरी है। चुनाव समय पर नहीं कराए जाने पर क्या कहा छात्र संघ से निकले नेताओं ने… चुनाव न कराना विश्वविद्यालय की प्रगतिशील परंपरा पर प्रश्नचिह्न छात्र संघ चुनाव लंबे समय तक न होना, न केवल छात्रों के अधिकारों का दमन है, बल्कि विवि की प्रगतिशील परंपरा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। – डॉ. तनुज खत्री लिंगदोह कमेटी की सिफारिश… हर साल चुनाव कराना जरूरी लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, विश्वविद्यालयों में हर साल छात्र संघ चुनाव कराना जरूरी है। यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी कमेटी सीनेट में भी छात्रों के पांच प्रतिनिधि होते हैं। लेकिन चुनाव नहीं होने के कारण सीनेट में छात्रों का एक भी प्रतिनिधि नहीं है। इस कारण सीनेट की बैठकों में छात्रों के मुद्दों को उठाने वाला कोई नहीं है। कैंपस की समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों का प्लेटफॉर्म है छात्रसंघ चुनाव महज प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया भर नहीं है, अपितु यह कैंपस की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्लेटफॉर्म है। – याज्ञवल्क्य शुक्ल ब्रिज की तरह है छात्र प्रतिनिधि यूनिवर्सिटी में कई छात्र-छात्राएं अपनी समस्या लेकर यूनिवर्सिटी प्रबंधन के पास नहीं जा पाते हैं। ऐसे में छात्र संघ एक ब्रिज का काम करता है। चुनाव समय पर होना चाहिए। – मंजिल उरांव क्या कहते हैं अधिकारीचुनाव के लिए बैठक जल्द जल्द होगा चुनाव का निर्णय राज्य में 24 साल में सिर्फ पांच बार चुनाव: राज्य गठन के बाद 24 साल में सिर्फ पांच बार विवि छात्र संघ के चुनाव हुए हैं। आरयू छात्र संघ चुनाव से निकले याज्ञवल्क्य शुक्ल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में सफल रहे हैं। इनके नेतृत्व में हुए प्रदेश के अधिकतर विवि में छात्र संघ चुनाव पर एबीवीपी का कब्जा हो गया था। वहीं पीजी छात्र संघ प्रेसिडेंट डॉ. तनुज खत्री भी प्रदेश की राजनीति में पहचान बनाने में सफल रहे हैं। वे झामुमो के प्रवक्ता का दायित्व निभा रहे हैं। छात्र संघ चुनाव नियमित होना चाहिए छात्र संघ के चुने हुए प्रतिनिधि को सीनेट में बैठने का अधिकार है। जहां छात्र व कैंपस के मुद्दों को रखते हैं। छात्र संघ का चुनाव नियमित होना चाहिए, ताकि छात्रों के मुद्दों को रखा जा सके। – अमनदीप मुंडा


