राजनांदगांव में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण:कम छात्र संख्या वाली 5 शालाओं का समायोजन, 336 शिक्षकों का होगा स्थानांतरण

राजनांदगांव में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने कलेक्टोरेट में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। जिले में प्राथमिक शालाओं में 248 और पूर्व माध्यमिक में 88 शिक्षक अतिशेष पाए गए हैं। नगरीय क्षेत्रों में छात्रों की तुलना में अधिक शिक्षक हैं। वहीं ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है। इससे शैक्षणिक गतिविधियां और परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। जिले में 6 प्राथमिक शालाएं शिक्षक विहीन और 94 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 9 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। प्राथमिक स्कूलों में 126 शिक्षकों को एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन शालाओं में भेजा जाएगा। 122 शिक्षकों को अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में पदस्थ किया जाएगा। यह युक्तियुक्तकरण शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 21.84 और पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 है। यह राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति है। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में गणित, रसायन, भौतिकी और जीव विज्ञान के विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध होंगे। शिक्षकों की समुचित पदस्थापना के लिए युक्तियुक्तकरण जरूरी – कलेक्टर कलेक्टर ने बताया कि यह कोई कटौती नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और समानता बढ़ाने की दिशा में एक जरूरी कदम है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य की प्राथमिक शालाओं में 3,608 और पूर्व माध्यमिक शालाओं में 1,762 शिक्षक अतिशेष हैं, जबकि राजनांदगांव जिले में प्राथमिक स्तर पर 248 और पूर्व माध्यमिक स्तर पर 88 शिक्षक अतिरिक्त हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि जहां शिक्षक नहीं हैं या बहुत कम हैं, वहां इन अतिरिक्त शिक्षकों को भेजा जाए ताकि सभी छात्रों को समान रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। राज्य में कुल 10,538 शालाओं में से केवल 241 स्कूलों का समायोजन किया गया है, शेष 10,297 स्कूल पहले की तरह संचालित रहेंगे। राजनांदगांव जिले की बात करें तो 1,335 स्कूलों में से केवल 5 का समायोजन किया गया है। समायोजन उन्हीं स्कूलों में किया गया है, जहां छात्रों की संख्या बहुत कम है और पास में ही बेहतर विकल्प मौजूद हैं। कई स्थानों पर एक ही परिसर में चल रहे दो स्कूलों को मिलाकर क्लस्टर मॉडल बनाया गया है, जिससे भवन, लाइब्रेरी, लैब जैसी सुविधाओं का बेहतर उपयोग हो सकेगा और बच्चों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आएगी। कलेक्टर ने बताया कि कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या छात्रों के अनुपात से बहुत ज्यादा है, जबकि कुछ स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। उदाहरण के लिए डोंगरगढ़ विकासखंड के घोटिया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 103 छात्रों पर केवल 3 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि 11 पद स्वीकृत हैं। वहीं दूसरी ओर ठाकुर प्यारेलाल पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 84 छात्रों पर 10 शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि जरूरत केवल 4 शिक्षकों की है। इसी तरह सेवताटोला, मटिया, बड़गांव और चमारराय टोलागांव जैसी प्राथमिक शालाओं में भी दर्ज संख्या के मुकाबले शिक्षक ज्यादा हैं, जिन्हें युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में शामिल किया गया है। कलेक्टर ने यह भी आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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