एचईसी में रौनक वापस लौटने लगी है। डेढ़ साल बाद एचईसी के तीनों प्लांट एचएमटीपी, एफएफपी और एचएमबीपी में यह रौनक वापस आई है। तीनों प्लांट में एकसाथ जोर-शोर से काम चल रहा है। 3500 कर्मी पूरे उत्साह से काम में जुटे हुए हैं। वर्तमान में इन प्लांट में राउरकेला स्टील प्लांट के स्पेयर पार्ट्स और आकांक्षा प्रोजेक्ट के लिए स्ट्रक्चर बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा वर्तमान में एचईसी के पास एनसीएल, सीसीएल, राउरकेला, डिफेंस, सेल आदि कंपनियों के 800 करोड़ रुपए के वर्क ऑर्डर हैं। इससे प्लांट्स की बंद मशीनें भी चलने लगी हैं। कामगारों का कहना है कि एचईसी में करीब 10 साल बाद ऐसी रौनक है। यदि ऐसा ही काम चलता रहे, तो एचईसी कर्मियों को कंपनी की ओर से दी गई सभी सुविधाएं भी बहाल हो जाएंगी। कर्मियों को लीव इनकैशमेंट, नियमित वेतन, कैंटीन की सुविधा, सीपीएफ लोन जैसी सुविधाएं भी मिलने लगेंगी। मालूम हो कि एचईसी कर्मियों का करीब 25 महीने का वेतन बकाया है। हालांकि मई महीने में एक माह का वेतन दिया गया है और इससे पहले मार्च में 3 माह का एक साथ वेतन दिया गया था। प्रबंधन ने कहा कि एचईसी की स्थिति को बेहतर बनाने में एचईसी प्रबंधन जुटा हुआ है। आगामी महीनों में और भी कार्यादेश मिलने की संभावना जताई जा रही है। दुनिया के हैवी मशीनों को बनाने की क्षमता : रामाशंकर एचईसी मजदूर संघ के महामंत्री रामाशंकर प्रसाद ने कहा कि एचईसी में दुनिया के किसी भी भारी मशीन को बनाने की क्षमता है। चंद्रयान की लॉन्चिंग पैड तक यहां बनाया गया है। डिफेंस के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। माइन्स के भी मशीन यहां बनाए जाते हैं। इस समय की स्थिति को देखकर लग रहा है कि आना वाला समय एचईसी के लिए बेहतर होगा। मर्जर या रिवाइवल के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एचईसी पुरानी रंगत में लौटने के लिए तैयार : लीलाधर सिंह हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह ने कहा कि एचईसी फिर से पुराने रंगत में लौटने के लिए तैयार है। इसके लिए सभी मिलजुल कर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एचईसी को बैंक गारंटी मिले, इसके लिए प्रबंधन प्रयास कर रहा है। साथ ही प्रबंधन के लोग विभिन्न जगहों से कार्यादेश जुटाने में लगे हैं।


